नई दिल्ली। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर अनुशासन, ताकत और एकता की झलक देखने को मिली। इस गौरवशाली मौके पर सीआरपीएफ की सहायक कमांडेंट सिमरन बाला ने इतिहास रच दिया। वह पहली महिला अधिकारी बन गई हैं, जिन्हें CRPF की पुरुष मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व करने का अवसर मिला। यह सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि भारतीय सुरक्षा बलों में महिला नेतृत्व की नई पहचान है।
नारी शक्ति का उदाहरण
सिमरन बाला की यह सफलता देश की महिलाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस 2026 पर उनके नेतृत्व ने यह साबित कर दिया कि सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी अब सिर्फ सहायक भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि कमांड और नेतृत्व की जिम्मेदारी भी वे उतनी ही प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं।
सिमरन बाला कौन हैं?
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सिमरन बाला का जन्म जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में हुआ।
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सीमित संसाधनों और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने बड़े सपने देखे।
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उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद UPSC CAPF परीक्षा में सफलता प्राप्त कर CRPF में सहायक कमांडेंट बनीं।
ऐतिहासिक उपलब्धि
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गणतंत्र दिवस परेड में सिमरन बाला को 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी की कमान सौंपी गई।
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यह पहला अवसर है जब CRPF की पुरुष मार्चिंग टुकड़ी का नेतृत्व कोई महिला अधिकारी कर रही है।
प्रशिक्षण और नेतृत्व क्षमता
CRPF अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान सिमरन ने अनुशासन, नेतृत्व कौशल, शारीरिक क्षमता और आत्मविश्वास में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने साबित किया कि नेतृत्व क्षमता लिंग से नहीं, योग्यता और परिश्रम से तय होती है।
महिला सशक्तिकरण का संदेश
सिमरन बाला की यह उपलब्धि यह संदेश देती है कि:
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महिलाएं सुरक्षा बलों में केवल भागीदारी नहीं, बल्कि नेतृत्व भी कर सकती हैं।
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अवसर मिलने पर महिलाएं हर मोर्चे पर खुद को साबित कर सकती हैं।
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यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए रास्ता आसान करेगा और समाज में महिलाओं के नेतृत्व को नए आयाम देगा।