नई दिल्ली। 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी–विकासपुरी हिंसा मामले में दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को बरी कर दिया है। गुरुवार को आए इस फैसले से पीड़ित परिवारों में गहरा आक्रोश और निराशा है।

अदालत का निर्णय सुनते ही पीड़ित परिवार की सदस्य बागी कौर भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें दशकों से न्याय का इंतजार है, लेकिन आज भी इंसाफ नहीं मिला। इस मामले में दो लोगों की हत्या हुई थी।

“अगर दोषी नहीं थे तो जेल क्यों भेजा गया?”

कोर्ट के बाहर बागी कौर ने कहा कि उनके परिवार के 10 सदस्यों की दंगों में जान गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सज्जन कुमार निर्दोष थे, तो उन्हें वर्षों तक जेल में क्यों रखा गया। उन्होंने कहा, “हमने अपनी आंखों से अत्याचार देखा, फिर भी आरोपी को छोड़ दिया गया।”

बागी कौर ने साफ किया कि वह इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगी। उनका कहना है कि जब तक पीड़ितों को न्याय नहीं मिलता, उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

इस फैसले के बाद एक बार फिर 1984 दंगों से जुड़े मामलों और पीड़ितों के लंबे संघर्ष पर सवाल खड़े हो गए हैं।