आम आदमी पार्टी से अलग होकर भाजपा में शामिल होने के बाद पहली बार मीडिया के सामने आईं राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने अपनी पूर्व पार्टी और उसके नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पार्टी की कार्यशैली, फैसले लेने के तरीके और राजनीतिक व्यवहार पर सवाल उठाते हुए अरविंद केजरीवाल को सीधे तौर पर “सबसे बड़ा विश्वासघाती” बताया।
पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला
दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में स्वाति मालीवाल ने कहा कि उन्हें विश्वासघाती कहे जाने की बात पूरी तरह गलत है। उन्होंने उल्टा आरोप लगाते हुए कहा कि असल में अरविंद केजरीवाल ने ही उन सिद्धांतों और विचारों से समझौता किया, जिनके आधार पर पार्टी खड़ी की गई थी। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़े होने वाले लोग ही बाद में उन्हीं लोगों के साथ खड़े नजर आए जिन्हें वे पहले गलत बताते थे।
“प्रचार की राजनीति” पर निशाना
मालीवाल ने आम आदमी पार्टी को “प्रेस वार्ता आधारित सरकार” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि शासन से ज्यादा ध्यान प्रचार पर दिया जाता था। उनके मुताबिक, हर दिन पहले से तय नैरेटिव तैयार किया जाता था और फिर उसी पर दिनभर प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती थीं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी में “कम खर्च में काम और भारी खर्च में प्रचार” की संस्कृति बन चुकी थी।
आंतरिक माहौल पर उठाए सवाल
उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के भीतर विधायकों और नेताओं पर ऐसे काम करने का दबाव बनाया जाता था जो नैतिक रूप से सही नहीं थे। इसी कारण उन्होंने कभी मंत्री या विधायक बनने की इच्छा नहीं जताई। मालीवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी में एकतरफा नेतृत्व और सख्त नियंत्रण का माहौल है, जहां असहमति की गुंजाइश बहुत कम है।
पंजाब सरकार पर भी टिप्पणी
स्वाति मालीवाल ने कहा कि दिल्ली के बाद अब पंजाब में भी वही मॉडल लागू किया जा रहा है, जिससे हालात बिगड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां ऐसे लोग महत्वपूर्ण पदों पर हैं जिन पर गंभीर आरोप लग चुके हैं, और इससे प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
पार्टी छोड़ने का कारण
महिला आरक्षण से जुड़े “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि पार्टी की ओर से उन्हें इसका विरोध करने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने महिलाओं के अधिकारों से जुड़े किसी भी मुद्दे पर विरोध से इनकार कर दिया। यहीं से उन्होंने पार्टी छोड़ने का मन बना लिया था।