दिल्ली में भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत और बढ़ती दिखाई दे रही है। यमुना नदी में अमोनिया का स्तर बढ़ने के कारण दिल्ली जल बोर्ड के दो प्रमुख जल शोधन संयंत्रों की क्षमता पर बड़ा असर पड़ा है, जिससे जल उत्पादन लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक घट गया है। इसके चलते राजधानी के कई हिस्सों में लोगों को कम दबाव में पानी की आपूर्ति मिल रही है।
दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, वजीराबाद पोंड क्षेत्र में यमुना के पानी में अमोनिया का स्तर 2.8 पीपीएम से ऊपर पहुंच गया है। इस वजह से वजीराबाद और चंद्रावल जल शोधन संयंत्रों में पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। तकनीकी कारणों से दोनों प्लांट्स की क्षमता कम करनी पड़ी है, जिससे कुल जल उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यमुना के पानी की गुणवत्ता में सुधार नहीं होता, तब तक कई इलाकों में सीमित और कम दबाव वाली जल आपूर्ति ही जारी रहेगी। अमोनिया की अधिक मात्रा वाले पानी को शुद्ध करना कठिन होता है और यदि इसे पूरी तरह उपचारित किए बिना सप्लाई किया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसी वजह से जल बोर्ड को नियंत्रित सप्लाई का सहारा लेना पड़ रहा है।
इस प्रभावित आपूर्ति का असर राजधानी के कई बड़े इलाकों पर पड़ा है। वजीराबाद संयंत्र से जुड़े मजनू का टीला, आईएसबीटी, आईटीओ, एनडीएमसी क्षेत्र, डिफेंस कॉलोनी, साउथ एक्सटेंशन, ग्रेटर कैलाश, पंजाबी बाग, आजादपुर, मॉडल टाउन, जहांगीरपुरी और अन्य क्षेत्रों में पानी की सप्लाई प्रभावित हुई है। वहीं चंद्रावल संयंत्र से जुड़े करोल बाग, पटेल नगर, राजेंद्र नगर, सिविल लाइंस, झंडेवालान और आसपास के इलाकों में भी जलापूर्ति बाधित हो गई है।
दिल्ली जल बोर्ड ने लोगों से अपील की है कि वे पानी का उपयोग सोच-समझकर करें और अनावश्यक बर्बादी से बचें। साथ ही जरूरत के अनुसार पानी संग्रह करने और घरेलू उपयोग में संयम बरतने की सलाह दी गई है।
गौरतलब है कि दिल्ली की पेयजल व्यवस्था काफी हद तक यमुना पर निर्भर है। हरियाणा से आने वाला प्रदूषित पानी, औद्योगिक अपशिष्ट और सीवेज के कारण समय-समय पर यमुना में अमोनिया का स्तर बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर राजधानी की जल आपूर्ति पर पड़ता है। गर्मी के मौसम में बढ़ी हुई मांग ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।