सोनीपत। सिंघु बॉर्डर पर किसान आंदोलन के दौरान हुए लखबीर सिंह हत्याकांड में अदालत ने चार निहंगों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। इस फैसले के बाद पुलिस की जांच और अभियोजन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह मामला 15 अक्टूबर 2021 का है, जब तरनतारन जिले के चीमा खुर्द गांव निवासी 35 वर्षीय लखबीर सिंह का शव पुलिस बैरिकेड पर उल्टा लटका हुआ मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर धारदार हथियारों से कई गंभीर चोटों के निशान पाए गए थे।
घटना के बाद निहंग समुदाय ने आरोप लगाया था कि लखबीर ने धार्मिक ग्रंथ की कथित बेअदबी का प्रयास किया था, जिसके बाद यह घटना हुई। इसी मामले में उसी दिन सरबजीत सिंह ने आत्मसमर्पण कर दिया था, जबकि अगले दिन नारायण सिंह, भगवंत सिंह और गोविंद प्रीत सिंह ने भी पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया था।
पुलिस ने जांच के दौरान रस्सी समेत कई सबूत बरामद किए थे और मामला अदालत में पेश किया गया था। हालांकि, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा, जिसके चलते चारों निहंगों को बरी कर दिया गया।
इसी बीच एक अन्य आरोपी अमन सिंह अब तक फरार है और उसे अदालत ने भगोड़ा घोषित किया हुआ है।
घटना के बाद पंजाब सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच टीम (SIT) का गठन भी किया था, लेकिन लंबे समय बाद आए इस फैसले ने जांच प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।