आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने के फैसले को गैरकानूनी बताते हुए उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की है। पार्टी नेता संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि इस मामले में राज्यसभा के सभापति को औपचारिक पत्र भेजकर इन सांसदों को अयोग्य घोषित करने का अनुरोध किया जाएगा।
दल-बदल कानून का दिया हवाला
संजय सिंह ने स्पष्ट किया कि दल-बदल विरोधी कानून के तहत संसद के किसी भी सदन में किसी तरह के विभाजन या गुट को कानूनी मान्यता नहीं दी जाती, चाहे उसमें दो-तिहाई बहुमत का दावा ही क्यों न किया जाए। उन्होंने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची भी लोकसभा या राज्यसभा में किसी अलग गुट या समूह को वैध नहीं मानती।
आप ने कदम को बताया गैरकानूनी
आप नेतृत्व का कहना है कि भाजपा में शामिल होने का यह निर्णय पूरी तरह से नियमों और संविधान के खिलाफ है। पार्टी ने इसे अवैध कदम करार देते हुए राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति से इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग करने की बात कही है।
सात सांसदों के फैसले से बढ़ी सियासी हलचल
शुक्रवार को सामने आए घटनाक्रम में कहा गया कि आम आदमी पार्टी के कुल दस राज्यसभा सांसदों में से सात ने भाजपा के साथ जाने का फैसला किया है। इस घोषणा के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि यह दल-बदल कानून का सीधा उल्लंघन है और इन सांसदों को सदन से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। अब सभी की नजर इस पर है कि राज्यसभा सभापति इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं।