सोलन। क्षेत्रीय परिवहन एवं लाइसेंसिंग प्राधिकरण (आरएलए) सोलन में बड़े पैमाने पर हुए फर्जीवाड़े में पुलिस ने छह आरोपियों को धर दबोचा है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दो क्लर्क और चार एजेंट शामिल हैं। इस मामले में सोलन के अलावा बिलासपुर, मंडी, ऊना और कांगड़ा जिले के भी आरोपी जुड़े हैं। मुख्य आरोपी बिलासपुर का क्लर्क गौरव भारद्वाज बताया जा रहा है, जिसने सोलन आरएलए में फर्जी यूजर आईडी बनाकर पूरी प्रक्रिया का संचालन किया।

जांच से पता चला कि गौरव ने एक नेटवर्क तैयार किया था जिसमें चार एजेंट शामिल थे। ये एजेंट वाहन मालिकों से अवैध धनराशि वसूलते और उन्हें आरएलए सोलन कार्यालय में ले जाते थे। पुलिस ने उप पुलिस अधीक्षक अशोक चौहान के नेतृत्व में विशेष अन्वेषण दल (एसआईटी) का गठन कर गहन जांच की।

जांच में यह सामने आया कि कई वाहनों का पंजीकरण वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया। इसमें मोटर वाहन निरीक्षक की निगरानी के बिना पंजीकरण, स्वामित्व स्थानांतरण और वजन में संशोधन जैसी प्रक्रियाएं शामिल थीं। आरएलए सोलन के क्लर्क जितेंद्र ठाकुर की आधिकारिक आईडी के अलावा फर्जी आईडी बनाई गई, जिनके जरिए वाहन वेरिफिकेशन और अप्रूवल की प्रक्रियाओं को अवैध रूप से पूरा किया गया।

तकनीकी जांच में आईपी लॉग्स, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और ओटीपी रिकॉर्ड्स का विश्लेषण किया गया। इसके आधार पर गौरव और उसके एजेंटों – राजकुमार, विकास सिंह, जितेंद्र और अनिल – की भूमिका स्पष्ट हुई। आरोपियों ने वाहन मालिकों से वसूली कर उनके दस्तावेजों में हेराफेरी की, जैसे वजन बढ़ाना, ऑनर सीरियल नंबर बदलना, बैंक नाम हटाना और बिना वैधानिक प्रक्रिया के पंजीकरण कराना। इस पूरे नेटवर्क के माध्यम से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ।

गिरफ्तार आरोपियों की सूची:

  1. जितेंद्र ठाकुर – सोलन
  2. अनिल कुमार – बिलासपुर
  3. राज कुमार – ऊना
  4. जितेंद्र कुमार – मंडी
  5. नरेश कुमार – बिलासपुर
  6. विकास सिंह उर्फ शालू – कांगड़ा

आरोपियों पर आईपीसी की धाराओं 318(4), 338, 336(3), 340(2) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

मामले का इतिहास:
26 जनवरी 2026 को आरएलए सोलन की अधिकारी डॉ. पूनम बंसल ने एसपी के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि कुछ क्लर्क और एजेंटों ने वाहन पंजीकरण, स्वामित्व स्थानांतरण और लोडेड वेट में अनियमितताएं कीं। जांच में यह भी पाया गया कि कई लेनदेन सरकारी नेटवर्क के बाहर स्थित आईपी एड्रेस से किए गए।

पुलिस ने बताया कि अभी जांच जारी है और अन्य संभावित आरोपियों और नेटवर्क की पहचान की जा रही है। तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई भी की जा रही है।