मंडी। हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू और उनकी सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि सरकार केवल मंचों और घोषणाओं तक सीमित रह गई है, जबकि जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

मिल्क प्लांट प्रोजेक्ट पर सवाल

कांगड़ा के ढगवार में बन रहे 225 करोड़ रुपये के अत्याधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री द्वारा काम में खामियां मिलने पर अधिकारियों को फटकार लगाने और निर्माण कार्य रुकवाने की घटना पर जयराम ठाकुर ने प्रतिक्रिया दी।

उन्होंने कहा कि जिस परियोजना को फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य था, उसमें अंतिम समय में तकनीकी बदलाव और अनियमितताओं का सामने आना प्रशासनिक समन्वय की कमी को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की निगरानी महीनों तक नहीं की गई।

सरकार की कार्यशैली पर आरोप

जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर अधिकारियों पर नाराजगी जताना केवल एक “दिखावटी कार्रवाई” है। उनका आरोप है कि यदि सरकार गंभीर होती तो समय रहते खामियों को दूर किया जाता, न कि डेडलाइन के करीब आकर काम रोका जाता।

उन्होंने यह भी कहा कि 225 करोड़ रुपये की इस परियोजना में किसी भी तरह का गुणवत्ता से समझौता प्रदेश के हितों के खिलाफ है और इससे सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है।

जवाबदेही पर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि यदि मुख्यमंत्री के निर्देशों के बावजूद तकनीकी बदलाव हुए, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कई स्तरों पर लापरवाही सामने आ रही है।

कृषि विश्वविद्यालय जमीन विवाद पर टिप्पणी

पालमपुर स्थित चौधरी सरवण कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय की जमीन को पर्यटन विभाग को हस्तांतरित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से इनकार के बाद भी जयराम ठाकुर ने सरकार पर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि यह फैसला पहले ही कानूनी रूप से विवादित था और उन्होंने मुख्यमंत्री को पहले ही आगाह किया था कि इस तरह के निर्णय टिकाऊ नहीं होंगे।

सरकार पर गंभीर आरोप

जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार संसाधनों के उपयोग को लेकर गलत दिशा में निर्णय ले रही है, जिससे प्रदेश के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे न केवल विकास कार्य बाधित हो रहे हैं, बल्कि कानूनी विवादों के कारण समय और संसाधन भी बर्बाद हो रहे हैं।