पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे टकराव के बीच एक नए और अत्याधुनिक हथियार के इस्तेमाल की चेतावनी देकर स्थिति को और गंभीर बना दिया है।
ईरान की सख्त चेतावनी
ईरानी नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल शहराम ईरानी ने सरकारी मीडिया से बातचीत में कहा कि देश जल्द ही ऐसे हथियार का उपयोग कर सकता है, जिससे विरोधी पक्ष में दहशत फैल जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह हथियार पहले से ही तैयार स्थिति में है और दुश्मन के बेहद करीब मौजूद है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि इसके असर से विरोधी पक्ष को गंभीर झटका लग सकता है, उम्मीद है कि वे इसे सहन कर पाएंगे।
अमेरिका की रणनीति पर निशाना
ईरानी कमांडर ने अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि आर्थिक प्रतिबंध और तेल व्यापार पर रोक लगाकर ईरान को दबाव में लाने की कोशिशें पूरी तरह असफल रही हैं। उनके अनुसार, जिन रणनीतियों के जरिए तेज नतीजे की उम्मीद की गई थी, वे अब सैन्य और रणनीतिक चर्चाओं में मजाक बन चुकी हैं।
ट्रंप प्रशासन का रुख
यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी शर्तों के बदले अमेरिकी नाकेबंदी में राहत की बात कही गई थी। प्रस्ताव में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत टालने का सुझाव भी शामिल था, जिसे अमेरिका ने स्वीकार नहीं किया।
सैन्य दावों और जवाबी हमलों का दावा
ईरानी पक्ष ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन (CVN-72) पर कई मिसाइल ऑपरेशन किए, जिससे कुछ समय के लिए उसकी गतिविधियां प्रभावित हुईं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
ईरान का यह भी कहना है कि संघर्ष शुरू होने के बाद उसने अमेरिका और इजरायल से जुड़े ठिकानों पर 100 से अधिक जवाबी हमले किए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव
ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल गुजरता है।
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस क्षेत्र से गुजरने वाले कई जहाजों पर नियंत्रण और अनुमति की व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि बिना अनुमति किसी भी गतिविधि पर सैन्य कार्रवाई हो सकती है।
आरोप और पलटवार
ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका पर समुद्री कानूनों के उल्लंघन और जहाजों को जब्त करने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कुछ मामलों में चालक दल के सदस्यों को हिरासत में भी लिया गया, जिसे वे अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन मानते हैं।
ईरानी पक्ष ने यह भी चेतावनी दी है कि संघर्ष में हुए नुकसान का जवाब भविष्य में और सख्त तरीके से दिया जाएगा, और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का परिणाम गंभीर हो सकता है।