जम्मू और कश्मीर में हाल ही में एक स्थानीय क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान एक खिलाड़ी के हेलमेट पर फलस्तीनी झंडा लगाने के बाद विवाद पैदा हो गया है। मामले की जांच के लिए पुलिस ने प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए खिलाड़ी फुरकान उल हक का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि फलस्तीन में हो रही घटनाओं पर चर्चा करना गलत नहीं है और लोगों को स्वतंत्र रूप से अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए। मुफ्ती ने कहा, "पश्चिमी देशों में भी गाजा में हो रही मौतों के खिलाफ प्रदर्शन होते हैं। जम्मू-कश्मीर में छोटी-छोटी बातों पर परेशान करना और वीपीएन पर प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चोट है।"
इस बीच, राजनीतिक पंडितों का कहना है कि यह विवाद अलग-अलग विचारधाराओं के टकराव को भी उजागर करता है। इल्तिजा मुफ्ती ने भाजपा की प्रतिक्रिया पर कहा कि कोई भी व्यक्ति या संगठन यहां किसी विशेष विचारधारा को थोप नहीं सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी को भी "जय श्री राम" या "भारत माता की जय" जैसे नारे लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर में निराशा के माहौल का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि बिजली के बढ़ते बिल, वादों की अनदेखी और वीपीएन प्रतिबंध के कारण आम जनता अपनी परेशानियों को खुलकर व्यक्त नहीं कर पा रही है। उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में बिजली की दरें लगभग 300 प्रतिशत बढ़ गई हैं और कई क्षेत्रों में मीटर होने के बावजूद पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही।
इसके अलावा, मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर भी निशाना साधा और कहा कि सरकार ने चुनावी वादों को पूरा नहीं किया। उन्होंने प्रीपेड मीटर लगाने और बिजली तथा राशन की उपलब्धता में कमी की आलोचना करते हुए कहा कि यह केवल कुछ धनी परिवारों तक सीमित है, जबकि आम जनता इससे प्रभावित हो रही है।