श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब सरकार द्वारा मटन कारोबारियों पर लगाए गए कर को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे पूरी तरह अनुचित करार दिया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राज्य सरकार गंभीरता से ले रही है और लगातार बातचीत के जरिए समाधान की कोशिश की जा रही है।

श्रीनगर स्थित एसकेआईसीसी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बताया कि उन्होंने इस मामले को कुछ महीने पहले व्यक्तिगत रूप से पंजाब के मुख्यमंत्री के सामने उठाया था। अब इस संबंध में एक बार फिर औपचारिक पत्र भेजकर इस कर व्यवस्था पर पुनर्विचार की मांग की गई है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के मटन व्यापारी राजस्थान से पशुधन खरीदकर अपने राज्य लाते हैं और केवल ट्रांजिट के रूप में पंजाब के राजमार्गों का उपयोग करते हैं। ऐसे में पंजाब में न तो कोई व्यापार होता है और न ही कोई आर्थिक गतिविधि। उन्होंने कहा कि सिर्फ रास्ते के उपयोग के आधार पर कर लगाना न्यायसंगत नहीं है और यह स्थानीय कारोबारियों पर अतिरिक्त बोझ डालता है।

उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यदि पंजाब सरकार इस मामले का समाधान नहीं करती है तो इसे उत्तर क्षेत्रीय परिषद (नॉर्थ ज़ोन काउंसिल) के समक्ष उठाया जाएगा। इसके साथ ही केंद्र सरकार से भी हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।

उन्होंने इस कर को “अनुचित” बताते हुए कहा कि जब पंजाब के भीतर कोई व्यापारिक लेन-देन ही नहीं हो रहा है, तो इस तरह का कर लगाना किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।