रांची। झारखंड में कथित शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई एक बार फिर तेज हो गई है। इसी क्रम में सोमवार को पूर्व वित्त मंत्री और लोहरदगा से कांग्रेस विधायक रामेश्वर उरांव के पुत्र रोहित उरांव ईडी के समन पर पूछताछ के लिए उपस्थित नहीं हुए।
रोहित उरांव को रांची एयरपोर्ट रोड स्थित ईडी कार्यालय में बुलाया गया था। वहीं, पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव को भी 30 जून को पूछताछ के लिए तलब किया गया है। पिता-पुत्र दोनों ने एजेंसी को पत्र भेजकर पेशी के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है।
समय मांगने की दी गई वजह
सूत्रों के अनुसार, अपने पत्र में दोनों ने कहा है कि उन्हें अपने पक्ष से जुड़े दस्तावेजों को तैयार करने के लिए समय की आवश्यकता है, इसलिए फिलहाल उन्हें राहत दी जाए। हालांकि ईडी की ओर से इस अनुरोध पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
जानकारी के मुताबिक, एजेंसी जल्द ही दोनों को दोबारा समन जारी कर पूछताछ के लिए बुला सकती है।
पुराने मामलों से जुड़ी जांच
यह पूरा मामला वर्ष 2022 में दर्ज की गई ईसीआईआर से जुड़ा है, जो देवघर में दर्ज चार अलग-अलग एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इनमें जमीन पर कथित अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेजों से खरीद-फरोख्त, अवैध बालू कारोबार और शराब कारोबार से जुड़े आरोप शामिल थे।
इसके बाद ईडी ने 23 अगस्त 2023 को झारखंड के तत्कालीन वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव और शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी समेत कई लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान रोहित उरांव के ठिकाने से लगभग 30 लाख रुपये नकद और कई अहम दस्तावेज बरामद होने की बात सामने आई थी।
निवेश और लेनदेन की जांच
जांच एजेंसी का दावा है कि दस्तावेजों से यह संकेत मिले हैं कि शराब नीति के दौरान रोहित उरांव ने अपने सहयोगियों के जरिए निवेश से जुड़े लेनदेन किए थे। इसी आधार पर उनसे पूछताछ जरूरी मानी जा रही है।
ईडी पहले ही इस मामले में कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें शराब कारोबारी योगेंद्र तिवारी का नाम प्रमुख है।
जांच फिर हुई तेज
सूत्रों के अनुसार, ईडी ने इस मामले में एक बार फिर अपनी जांच की गति बढ़ा दी है। एजेंसी अब योगेंद्र तिवारी और उनके सहयोगियों, जिनमें प्रेम प्रकाश का नाम भी शामिल है, से फिर से पूछताछ कर सकती है।
ईडी का कहना है कि नए साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की भूमिका की गहन जांच की जा रही है, जिसमें टेंडर मैनेजमेंट, अवैध निवेश और फंड ट्रेल की कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।