रांची। जिलों के कोषागार से अवैध वेतन निकासी के बहुचर्चित मामले में सीआईडी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। अब जांच एजेंसी न सिर्फ ऑनलाइन ट्रांसफर हुए पैसों की पड़ताल कर रही है, बल्कि यह भी पता लगाने में जुटी है कि बैंक खातों से नकद निकासी के बाद राशि का उपयोग या ट्रांसफर किस तरह और किस स्तर तक किया गया।
सीआईडी अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में अवैध वेतन भुगतान से जुड़े डिजिटल लेन-देन के सबूत मिले हैं, लेकिन अब नकद निकासी के बाद पैसों की आगे की कड़ी (फाइनेंशियल चैन) को ट्रैक किया जा रहा है, ताकि पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सके।
तीन जिलों की एफआईआर अब सीआईडी के पास
वित्त विभाग की अनुशंसा और मुख्यमंत्री के आदेश के बाद बोकारो, हजारीबाग और पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) में दर्ज मामलों को सीआईडी ने टेकओवर कर लिया है। इन सभी मामलों को दोबारा दर्ज कर विशेष जांच शुरू की गई है।
अब तक संयुक्त कार्रवाई में 14 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है, जिनमें हजारीबाग से 6 और बोकारो व चाईबासा से 4-4 आरोपी शामिल हैं। जांच टीम ने कुछ आरोपियों से रिमांड पर पूछताछ भी की है।
हालांकि, अधिकारियों के हालिया तबादलों के कारण जांच की रफ्तार कुछ समय के लिए प्रभावित हुई है, लेकिन नए अधिकारियों के प्रभार संभालते ही जांच फिर तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
हजारीबाग में जांच अधिकारी बदला
हजारीबाग मामले में जांच अधिकारी (IO) में भी बदलाव हुआ है। पहले यह जिम्मेदारी सीआईडी इंस्पेक्टर सह थानेदार नवल किशोर प्रसाद के पास थी, जिन्हें पदोन्नति के बाद नए पद पर स्थानांतरण का इंतजार था। उनके तबादले के बाद अब यह केस हजारीबाग सीआईडी में पदस्थापित डीएसपी राजेश कुमार को सौंपा गया है। हालांकि उन्होंने अभी औपचारिक रूप से प्रभार ग्रहण नहीं किया है।
सीआईडी थाने में नया प्रभारी नियुक्त
सीआईडी थाना में भी प्रशासनिक बदलाव किया गया है। डीएसपी बैंकटेश कुमार को नया थाना प्रभारी बनाया गया है। वे हाल ही में देवघर से स्थानांतरित होकर सीआईडी में शामिल हुए हैं।
छह जिलों तक फैली जांच
इसके अलावा, उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के प्रधान सचिव डॉ. अमिताभ कौशल के नेतृत्व वाली आठ सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच समिति अब इस मामले की जांच छह जिलों तक विस्तारित कर चुकी है।
पहले यह समिति केवल बोकारो और हजारीबाग की जांच कर रही थी, लेकिन अब रांची, रामगढ़, पश्चिमी सिंहभूम और देवघर को भी जांच के दायरे में शामिल किया गया है। समिति का कहना है कि सभी जिलों में अवैध वेतन निकासी की प्रक्रिया और पैटर्न लगभग समान है, इसलिए पूरे नेटवर्क की जांच एक साथ की जाएगी।