नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय राफेल लड़ाकू विमानों को नुकसान पहुंचाने के पाकिस्तान के दावों पर अब आधिकारिक दस्तावेजों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय वायुसेना (IAF) द्वारा जारी हालिया टेंडर और तकनीकी दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि फ्रांस से प्राप्त सभी 36 राफेल विमान पूरी तरह सुरक्षित हैं और नियमित रूप से सेवा में सक्रिय हैं।

पाकिस्तान की ओर से उस समय दावा किया गया था कि उसने चीन की मदद से विकसित “किल चेन” प्रणाली के जरिए भारतीय राफेल विमानों को निशाना बनाया था। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में भी इस तरह के दावे सामने आए थे, जिनमें J-10C लड़ाकू विमानों और PL-15 मिसाइलों के जरिए राफेल को मार गिराने की बात कही गई थी। भारत ने लगातार इन दावों को गलत और भ्रामक प्रचार बताया था।

अब 15 जून 2026 को भारतीय वायुसेना मुख्यालय द्वारा जारी रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) और संबंधित टेंडर दस्तावेजों ने स्थिति को और स्पष्ट कर दिया है। इन दस्तावेजों के अनुसार, सभी 36 राफेल विमानों के लिए पांच महीने का ब्रिज सपोर्ट पैकेज मांगा गया है, जिसमें रखरखाव और तकनीकी सहायता शामिल है।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि किसी भी विमान को नुकसान हुआ होता, तो पूरे बेड़े के लिए समान स्तर पर रखरखाव और उड़ान घंटों की योजना नहीं बनाई जाती। दस्तावेजों में लगभग 2,250 फ्लाइंग आवर्स का उल्लेख भी किया गया है, जो पूरे बेड़े की परिचालन क्षमता को दर्शाता है।

IAF के अनुसार, यह अस्थायी व्यवस्था इसलिए की गई है क्योंकि मौजूदा परफॉर्मेंस बेस्ड लॉजिस्टिक्स (PBL) कॉन्ट्रैक्ट की अवधि समाप्त होने के बाद नया समझौता अभी अंतिम चरण में है। यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी जब तक नया दीर्घकालिक अनुबंध लागू नहीं हो जाता।

दस्तावेजों से यह भी स्पष्ट है कि राफेल बेड़े के संचालन, मेंटेनेंस और लॉजिस्टिक सपोर्ट में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। प्रत्येक विमान के लिए वार्षिक उड़ान लक्ष्य के आधार पर यह पूरी योजना तैयार की गई है।

रक्षा सूत्रों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर के दौरान राफेल विमानों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में सटीक हमले किए और सभी विमान सुरक्षित रूप से अपने बेस पर लौटे। इन अभियानों में इस्तेमाल किए गए आधुनिक हथियारों और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम ने उनकी क्षमता को और प्रभावी साबित किया।

भारत ने 2016 में फ्रांस के साथ हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत कुल 36 राफेल विमान हासिल किए थे, जो वर्तमान में अंबाला और हाशिमारा एयरबेस पर तैनात हैं।

इसके साथ ही भारत अपनी वायु शक्ति को और मजबूत करने के लिए 114 अतिरिक्त राफेल जेट्स की संभावित खरीद प्रक्रिया पर भी विचार कर रहा है। यह प्रस्तावित सौदा मेक इन इंडिया के तहत देश में निर्माण की संभावना के साथ आगे बढ़ सकता है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह नया टेंडर केवल तकनीकी और रखरखाव व्यवस्था से जुड़ा है, और इससे बेड़े की संख्या या परिचालन स्थिति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।