धार स्थित भोजशाला को लेकर चल रहा लंबा विवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ इस अहम मामले में शुक्रवार को अपना फैसला सुना सकती है, जिस पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं।

इस मामले में दायर पांच जनहित याचिकाओं पर अदालत ने 24 दिनों तक लगातार सुनवाई की थी। सभी पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद दो दिन पहले कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ इस बहुप्रतीक्षित निर्णय को सुनाएगी, जिससे यह तय होने की उम्मीद है कि भोजशाला का स्वरूप मंदिर है या मस्जिद।

यह विवाद पिछले 13 वर्षों से अदालत में विचाराधीन है। याचिकाओं में हिंदू पक्ष, मुस्लिम पक्ष, जैन समाज और स्थानीय निवासियों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश की हैं। हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मंदिर घोषित कर नियमित पूजा-अर्चना की अनुमति की मांग की है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताते हुए वहां नमाज की इजाजत चाहता है। जैन समाज का दावा है कि यह स्थल ऐतिहासिक रूप से जैन मंदिर रहा है और यहां अंबिका देवी की प्रतिमा स्थापित थी, इसलिए पूजा का अधिकार उन्हें भी मिलना चाहिए।

हाईकोर्ट के निर्देश पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने पिछले वर्ष भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक विस्तृत सर्वे किया था और करीब 2000 पन्नों की रिपोर्ट अदालत में सौंपी थी। रिपोर्ट में परिसर से प्राप्त मूर्तियों के अवशेष, शिलालेख, सिक्के और स्थापत्य संरचनाओं का विस्तृत विवरण शामिल है। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट में इस ढांचे को 12वीं शताब्दी के परमार काल से जुड़ा बताया है।

एएसआई के अनुसार, यहां मिले पुरातात्विक साक्ष्य यह संकेत देते हैं कि यह स्थान कभी एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा होगा। वहीं मुस्लिम पक्ष ने इस सर्वे पर आपत्ति जताते हुए इसे गलत बताया है और इसकी वीडियोग्राफी सहित अन्य प्रक्रियात्मक दस्तावेजों पर सवाल उठाए हैं।