ग्वालियर में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं पर लगाए गए डकैती के केस के मामले में मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने संज्ञान लिया है। उन्होंने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिए हैं कि युवकों पर डकैती की धारा लगाना न्यायोचित नहीं लगता, क्योंकि युवक आपराधिक पृष्ठभूमि के नहीं हैं। यह मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा मामला है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मेरे संज्ञान में यह बात आई है। यह सही है कि युवकों का तरीका गलत था। संपूर्ण परिस्थितियों को देखते हुए जांच के पश्चात न्यायपूर्ण कार्रवाई किया जाना उचित होगा। 

बता दें, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा भी इस मामले में आवाज उठा चुके हैं। उन्होंने भी डकैती का कैसे लगाए जाने को गलत बताया है। पूर्व सीएम शिवराज और प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा का कहना है कि छात्रों का इरादा गलत नहीं था। लेकिन मामले में छात्रों पर डकैती का केस दर्ज हुआ और हाईकोर्ट जज ने उन्हें जमानत देने से मना कर दिया। इधर, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने भी इस मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके माननीय न्यायालय से संवेदना दिखाते हुए कार्यकर्ताओं पर दर्ज केस वापस लेने की अपील की है। विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता शांति मार्च भी निकाल चुके हैं। न्याय के लिए वे लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।

यह है पूरा मामला
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों ने ग्वालियर में रेलवे स्टेशन पर बीमार पड़े चरणजीत सिंह को लेकर पहले जीआरपी थाने और रेलवे अधिकारियों के पास गुहार लगाई। लेकिन जब एक घंटे तक कोई उपचार नहीं हुआ तो छात्र स्टेशन से बाहर आए और वहां खड़ी न्यायाधीश की कार के ड्राइवर से चाबी छीन ली। इसके बाद बुजुर्ग को कार से अस्पताल ले गए। वहां उसका इलाज शुरू करवाया और परिजन को इसकी सूचना दी। हालांकि, बाद में उपचार के दौरान रणजीत सिंह की मौत हो गई।

छात्रों को मदद के बदले मिली जेल

ग्वालियर में जज की कार से बेहोश व्यक्ति को हॉस्पिटल भेजने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्रों पर केस दर्ज करने के खिलाफ विद्यार्थी परिषद द्वारा अब ग्वालियर के साथ ही प्रदेश भर में चरणबद्ध आंदोलन शुरू कर दिया गया है। एबीवीपी के छात्रों ने जहां माधव कॉलेज पर तालाबंदी की तो एक रोज पूर्व जीवाजी विद्यालय में शांति मार्च भी निकाला। इनका कहना है कि मानवता के लिए किसी व्यक्ति की मदद करने पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों के खिलाफ जो कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह गलत है।

आपको बता दें कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े छात्र ग्वालियर में रेलवे स्टेशन पर बीमार पड़े एक बजुर्ग को लेकर पहले जीआरपी थाने और रेलवे अधिकारियों के पास पहुंचे थे। लेकिन जब आधा घंटे तक उनका कोई उपचार नहीं हुआ तो वे स्टेशन से बाहर आए और वहां खड़ी एक जज की कार में उन्हें जबरन लेकर हॉस्पिटल पहुंचे और वहां उपचार शुरू करके उनके परिजनों को इसकी सूचना दी। हालांकि, उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इस बीच पड़ाव थाना पुलिस ने जज की गाड़ी जबरन ले जाने वाले लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली।

पुलिस को कार भी जयारोग्य चिकित्सालय में खड़ी मिल गई। उसके बाद पुलिस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के दो छात्रों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के छात्रों ने आंदोलन शुरू कर दिया है, जिसके लिए अलग-अलग कॉलेज और स्कूल और यूनिवर्सिटी में छात्र संगठन से जुड़े छात्र-छात्राएं पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। इसी क्रम में ग्वालियर माधव कॉलेज में आज तालाबंदी की गई। छात्र संगठन के पदाधिकारी का कहना है कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।