उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं में लड्डू प्रसादी को लेकर नया रुझान देखने को मिला है। पौष्टिकता से भरपूर रागी लड्डू के मुकाबले श्रद्धालु बेसन लड्डू को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। मंदिर के आंकड़े इस बदलाव को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।

रविवार को बेसन लड्डू की रिकॉर्ड बिक्री
रविवार को मंदिर परिसर में भारी भीड़ देखी गई। इस दौरान मंदिर समिति के 10 काउंटरों से कुल 58.528 क्विंटल बेसन लड्डू बिके, जिससे 28 लाख 3 हजार 50 रुपये की आमदनी हुई। वहीं, रागी लड्डू की बिक्री मात्र 6.11 क्विंटल रही, जिससे 2 लाख 84 हजार 100 रुपये प्राप्त हुए। आंकड़ों के अनुसार, बेसन लड्डू की मांग रागी लड्डू से लगभग दस गुना अधिक रही।

100 रुपये वाला पैकेट सबसे पसंदीदा
श्रद्धालुओं ने लड्डू खरीदते समय विभिन्न पैकेटों को चुना। सबसे ज्यादा बिके 100 रुपये वाले पैकेट, जिसमें 18,540 बेसन लड्डू और 1,215 रागी लड्डू शामिल थे। 50 रुपये वाले पैकेट में 9,113 बेसन और 1,540 रागी लड्डू बिके। वहीं 200 रुपये वाले आधा किलो पैकेट में श्रद्धालुओं ने 2,467 बेसन और 428 रागी लड्डू खरीदे।

एक दिन में 30 लाख से अधिक का कारोबार
मंदिर समिति ने अकेले रविवार को दोनों प्रकार के लड्डू से कुल 30 लाख 87 हजार रुपये से अधिक का विक्रय किया। समिति का कहना है कि लड्डू प्रसादी ‘नो लॉस, नो प्रॉफिट’ के आधार पर श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराई जाती है, ताकि आस्था के साथ गुणवत्ता भी बनी रहे।

12 दिनों में 643 क्विंटल लड्डू की बिक्री
शीतकालीन अवकाश के दौरान 25 दिसंबर 2025 से 5 जनवरी 2026 तक मंदिर समिति ने कुल 643.409 क्विंटल लड्डू प्रसादी बेची। इस अवधि में 573.118 क्विंटल बेसन लड्डू से 2 करोड़ 73 लाख 93 हजार 600 रुपये और 70.291 क्विंटल रागी लड्डू से 32 लाख 50 हजार 800 रुपये का विक्रय हुआ।

गुणवत्ता और भविष्य की उम्मीद
मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया कि लड्डू निर्माण में गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। प्रतिदिन खाद्य प्रशासन के निरीक्षक नमूने लेकर जांच करते हैं और केवल शुद्ध सामग्री का उपयोग किया जाता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में रागी लड्डू यानी श्री अन्नप्रसाद की स्वीकार्यता भी बढ़ेगी।