पंजाब के मानसा जिले की एक अदालत ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वे अगली तारीख पर उपस्थित नहीं होते हैं तो उनकी जमानत रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।

यह आदेश मंगलवार (28 अप्रैल) को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) राजिंदर सिंह नागपाल की अदालत ने नज़र सिंह मानशाहिया बनाम भगवंत मान और अन्य मामले की सुनवाई के दौरान जारी किया।

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि आरोपी पक्ष की ओर से चंडीगढ़ में एक अहम बैठक का हवाला देकर व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी गई थी। हालांकि अदालत ने इसे स्वीकार नहीं किया और कहा कि पहले भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने की अनुमति खारिज की जा चुकी है, और उन्हें सीधे अदालत में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया था।

अदालत ने अपने आदेश में यह भी दर्ज किया कि 20 अक्टूबर 2022 के बाद से भगवंत मान इस मामले में एक बार भी व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं हुए हैं, जिसके चलते सुनवाई की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। अदालत ने टिप्पणी की कि बार-बार दी जा रही छूट याचिकाएं पहले जैसी ही हैं और यह अदालत की कार्यवाही के प्रति गंभीरता की कमी को दर्शाती हैं।

हालांकि अदालत ने उस दिन के लिए छूट मंजूर कर दी, लेकिन साथ ही कड़ा निर्देश जारी करते हुए कहा कि अगली सुनवाई में आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। अदालत ने चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो जमानत रद्द करने सहित सख्त कदम उठाए जाएंगे।

इसके अलावा अदालत ने मामले से जुड़े अन्य सह-आरोपियों का भी उल्लेख किया, जिनमें से कुछ को उच्च न्यायालय से राहत मिल चुकी है, जबकि एक आरोपी के खिलाफ मामला उसकी मृत्यु के कारण समाप्त कर दिया गया है।

इसी बीच भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 273 के तहत दायर एक आवेदन पर भी अदालत ने संज्ञान लिया है, जिसमें वकील के माध्यम से पेश होने की अनुमति मांगी गई है। इस पर जवाब दाखिल करने के लिए अदालत ने 1 मई 2026 तक की समयसीमा तय की है।