चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को देश के प्रमुख इंजीनियरिंग और मेडिकल संस्थानों में प्रवेश के लिए तैयार करने के उद्देश्य से एक नई योजना शुरू करने का ऐलान किया है। इसके तहत स्कूल ऑफ एमिनेंस और मेरिटोरियस स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 10 से 12 के छात्रों को जेईई मेन, जेईई एडवांस और नीट की ऑनलाइन और संवादात्मक कोचिंग दी जाएगी।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना का उद्देश्य सरकारी और निजी स्कूलों के छात्रों के बीच अवसरों का अंतर कम करना है। यह केवल ऑनलाइन कक्षाओं तक सीमित नहीं होगी, बल्कि एक समग्र अकादमिक सपोर्ट सिस्टम तैयार किया जाएगा। इसमें संरचित कोचिंग, डाटा आधारित मूल्यांकन, तकनीक-सहायता और व्यक्तिगत मार्गदर्शन शामिल होगा, ताकि अधिक से अधिक छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें और बोर्ड परीक्षा की तैयारी भी संतुलित और तनाव-मुक्त बनी रहे।

राज्य में 118 स्कूल ऑफ एमिनेंस और 10 मेरिटोरियस स्कूल हैं। मेरिटोरियस स्कूल अमृतसर, बठिंडा, फिरोज़पुर, गुरदासपुर, जालंधर, लुधियाना, मोहाली, पटियाला, संगरूर और तलवाड़ा में स्थित हैं। इन स्कूलों में कुल 20,925 छात्र अध्ययनरत हैं, जिनमें 14,037 स्कूल ऑफ एमिनेंस और 6,888 मेरिटोरियस स्कूलों में पढ़ते हैं। इन स्कूलों में प्रवेश शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा के माध्यम से होता है।

कोचिंग और सपोर्ट सिस्टम
योजना के तहत एक कोचिंग एजेंसी प्रत्येक छात्र के अकादमिक जीवनचक्र की जिम्मेदारी संभालेगी। इसमें जागरूकता अभियान, ब्रिज कोर्स, डायग्नोस्टिक स्क्रीनिंग, नियमित लाइव कक्षाएं, डाउट सॉल्विंग, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और अंतिम परीक्षा की तैयारी शामिल होगी।

शुरुआत में सभी स्कूलों में ओरिएंटेशन वेबिनार और करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद कक्षा 9 और 10 के लिए तीन से चार सप्ताह का ब्रिज कोर्स चलाया जाएगा, जो खासकर ग्रामीण और पहली पीढ़ी के विद्यार्थियों की बुनियादी तैयारी मजबूत करेगा। इसके बाद ब्रिज कोर्स पर आधारित एक स्क्रीनिंग टेस्ट लिया जाएगा।

कक्षा 9 और 10 के छात्रों के लिए प्रतिदिन डेढ़ घंटे की कक्षाएं होंगी, जबकि कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए प्रतिदिन दो डेढ़ घंटे के सत्र होंगे, जिनमें भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान पढ़ाया जाएगा। प्रत्येक बैच में अधिकतम 150 छात्र शामिल होंगे। सभी कक्षाओं को रिकॉर्ड किया जाएगा और 12 घंटे के भीतर अपलोड कर दिया जाएगा, साथ ही स्कूल उपस्थिति की निगरानी करेंगे।

छात्रों को ई-बुक, नोट्स, अवधारणा मानचित्र, हल किए गए उदाहरण और प्रश्न बैंक प्रदान किए जाएंगे। योजना में साप्ताहिक और मासिक टेस्ट, पूर्ण लंबाई के मॉक टेस्ट, विषयवार विश्लेषण और कमजोरी मानचित्र भी शामिल होंगे। साल में दो बार 10-20 दिन के ग्रीष्म और शीतकालीन अकादमिक कैंप भी आयोजित किए जाएंगे। योजना की निगरानी के लिए रियल-टाइम डैशबोर्ड बनाए जाएंगे और प्रत्येक स्कूल में एक नोडल शिक्षक नियुक्त किया जाएगा, ताकि समन्वय और गुणवत्ता सुनिश्चित रहे।