पंजाब। मजदूर दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मजदूर वर्ग को समर्पित चर्चा की शुरुआत की। हालांकि सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Partap Singh Bajwa ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियमित सत्रों के बजाय बार-बार विशेष सत्र बुलाए जा रहे हैं, जिनका कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक आयोजित कई सत्रों में प्रश्नकाल और शून्यकाल को शामिल नहीं किया गया, जिससे विधायकों को जनता के मुद्दे उठाने का पूरा अवसर नहीं मिल पा रहा है।

इस पर मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विशेष सत्र पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी सदन में महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए हैं, जिनमें बेअदबी से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि आगामी मानसून सत्र में सभी विधायकों को पर्याप्त समय दिया जाएगा।

सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक Sukhpal Singh Khaira के मोबाइल उपयोग को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद सदन में हंगामा बढ़ गया। मंत्री हरपाल चीमा ने भी विधायक के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की।

इसके बाद माहौल और तनावपूर्ण हो गया जब विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि वे सदन में शराब के नशे में उपस्थित थे। इस बयान के बाद सदन में भारी हंगामा शुरू हो गया। नेता प्रतिपक्ष बाजवा ने मांग की कि सभी सदस्यों का अल्कोमीटर टेस्ट कराया जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

स्थिति बिगड़ने पर कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। वहीं विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि किसी भी सदस्य पर इस तरह के आरोप स्वीकार नहीं किए जाएंगे और अनुशासनहीनता पर कार्रवाई की जाएगी।

उधर, पंजाब में राजनीतिक माहौल के बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी चंडीगढ़ में अलग से “जनता दी विधानसभा” के नाम से एक समानांतर सत्र आयोजित किया। इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़, कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा और राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग सहित कई नेता शामिल हुए, जहां राज्य के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई।