केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पंचकूला औद्योगिक भूखंड आवंटन मामले में बड़ा कदम उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई के अनुसार यह मामला 2016 में दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री थे और साथ ही हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अध्यक्ष भी थे, तब पंचकूला में 14 औद्योगिक भूखंडों के आवंटन की प्रक्रिया में नियमों में बदलाव किया गया।
आरोप है कि आवेदन की समयसीमा समाप्त होने के बाद नियमों में संशोधन कर पात्रता मानदंडों को कम किया गया, जबकि वाइवा और अन्य मूल्यांकन मानकों में बदलाव कर चयन प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। इससे कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई।
जांच के मुताबिक, 14 भूखंडों के लिए कुल 582 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन बाद में इन भूखंडों का आवंटन बाजार मूल्य से काफी कम दर पर किया गया। अनुमान के अनुसार 30.34 करोड़ रुपये मूल्य के भूखंड लगभग 7.85 करोड़ रुपये में आवंटित कर दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ।
सीबीआई ने अपनी चार्जशीट के साथ हरियाणा सरकार से प्राप्त अभियोजन स्वीकृति भी अदालत में पेश की है। साथ ही कुछ अन्य अनुमतियों पर प्रक्रिया अभी जारी है।
सुनवाई के दौरान एक गवाह के बयान को भी अदालत में सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किया गया, जिसे सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।
किन-किन पर आरोप?
इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है, जिनमें तत्कालीन अधिकारी, पूर्व आईएएस अधिकारी, एचएसवीपी के अधिकारी, कारोबारी और उनके परिवार से जुड़े लोग शामिल हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी की भूमिका की विस्तृत जांच की गई है।
आगे क्या?
अदालत ने दस्तावेजों की जांच के बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की है, जबकि सीबीआई की चार्जशीट के बाद मामला अब न्यायिक प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है।