जयपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) बुधवार को राजस्थान के नाथद्वारा में स्थित श्रीनाथजी (Shrinathji) के मंदिर में जाकर पूजा-अर्चन की. उन्‍होंने जिस मूर्ति का दर्शन किया वह हिंदुओं का और भारत का गौरव है. यह मंदिर मुगल अत्याचारों की कहानी समेटे हुए है. यहां श्रीनाथजी की मूर्ति कृष्ण के बालरूप में 7 वर्ष की अवस्था में है. इस मंदिर में स्थापित श्रीनाथजी की मूर्ति मुगलकाल में औरंगजेब के हिंदू मंदिरों और मूर्तियां को तोड़ने के अभियान की याद दिलाती है. मुगल शासक औरंगजेब मूर्ति पूजा का विरोधी था. इसलिए उसने अपने शासनकाल में मंदिरों को तोड़ने के आदेश दिए थे.

औरंगजेब के आदेश पर अनेक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई थी. उस दौरान उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में स्थित श्रीनाथजी के मंदिर को तोड़ने का काम भी शुरू हो गया था. इससे पहले कि श्रीनाथजी की मूर्ति को कोई क्षति पहुंचे मंदिर के पुजारी दामोदरदास बैरागी मूर्ति को मंदिर से बाहर निकाल लाए. दामोदरदास वल्लभ संप्रदाय के थे और वल्लभाचार्य के वंशज थे.

औरंगजेब का डर
उन्होंने श्रीनाथजी की मूर्ति को बैलगाड़ी में रखा और उसके बाद कई राजाओं से आग्रह किया कि श्रीनाथजी का मंदिर बनाकर उसमें इसे स्थापित करवा देंवे. लेकिन औरंगजेब के डर से किसी ने उनका प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया. अंत में दामोदरदास बैरागी ने मेवाड़ के राजा राणा राजसिंह के पास संदेश भिजवाया. क्योंकि राणा राजसिंह पहले भी औरंगजेब को चुनौती दे चुके थे.

मेवाड़ के राणा राज सिंह ने दी थी औरंगजेब को ये चुनौती
पुजारी दामोदरदास बैरागी मूर्ति को बैलगाड़ी में रखकर वृंदावन से जयपुर होते हुए उदयपुर के नाथद्वारा लाए. कहा जाता है कि राणा राज सिंह ने औरंगजेब को चुनौती दी थी कि इस मूर्ति को हाथ लगाया तो उसे एक लाख राजपूतों के ऊपर से गुजरना पड़ेगा. इस तरह मुगलों के कहर से बचाकर श्रीनाथजी को यहां लाया गया था. इसी वजह से हिंदुस्तान में इस मंदिर को लेकर विशेष आस्था है.