कूनो नेशनल पार्क में विदेश से आए चीतों को लेकर एक नई चिंता सामने आई है। कुछ समय पहले उनके बाड़ों के आसपास तेंदुए की हलचल दिखी थी, जिससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया था।अभी यह मामला चल ही रहा था कि इसी बीच चीतों के करीब एक टाइगर की एंट्री होने की खबर आई है। जानकारी के मुताबिक एक बाघ राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व से घूमते हुए कूनो नेशनल पार्क पहुंच गया है।  इस टाइगर की पहचान रणथंभौर के T- 136 के तौर पर की गई है, जो कुछ समय से लगातार टाइगर रिजर्व से भागता फिर रहा है।

बताया जा रहा है कि चीतों के बाड़े से लगभग 15 किलोमीटर दूर बाघ की हलचल देखी गई है। श्योपुर वन मंडल ने रणथंभौर टाइगर रिजर्व के अधिकारियों से बात कर बाघ टी 136 की लोकेशन के बारे में पूछताछ की है। कूनो पार्क में अभी तीन चीते गौरव, शौर्य और आशा खुले जंगल में हैं, जिसमें आशा पिछले पांच दिनों से पार्क की सीमा से सात किलोमीटर दूर विजयपुर रेंज में है।

कूनो का अमला बाघ के पगमार्क ढूंढ रहा है, मोरावन बीट के रेंजर वीरेंद्र पूनिया ने कहा कि ग्रामीणों  ने पार्क से सटे गांव में बाघ आने की सूचना दी थी। बीती रात मवेशियों पर बाघ के हमले की सूचना भी है। अगर चीते और टाइगर में लड़ाई हुई तो चीते का बाघ से बचना मुश्किल है। पेंच टाइगर रिजर्व के संचालक रहे सेवानिवृत्त आईएफएस डॉक्टर रामगोपाल सोनी का कहना है कि बाघ ताकतवर होता है। चीता सिर्फ दौड़ कर ही बच सकता है। बाघ उसके बराबर तेजी से नहीं दौड़ सकता है। बाघ से चीते का सामना हुआ तो चीते की मौत निश्चित है, हालांकि सोनी यह भी मानते हैं कि सामना होने के बाद ही चीता बचाव के तरीके सीखेगा। जंगल की ऐसी ही प्रकृति है अगर चीते ने दौड़ लगाई तो वह बच जाएगा।