अंतरराष्ट्रीय स्तर: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता को लेकर असमंजस बरकरार है। संयुक्त राष्ट्र में इस्राइल के राजदूत डैनी डैनन ने स्पष्ट किया कि इस्राइल किसी भी वार्ता में शामिल नहीं होगा। मीडिया से बातचीत में डैनन ने कहा, "मुझे किसी भी बातचीत में हमारी भागीदारी की जानकारी नहीं है। हम अपना सैन्य अभियान जारी रखे हुए हैं।"
डैनन का कहना – ईरान को फिर से मजबूत नहीं होने देंगे
इस्राइली राजदूत ने कहा कि सैन्य अभियान के बाद कूटनीति जरूरी होती है, लेकिन इस्राइल यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान न तो परमाणु क्षमता हासिल कर पाए और न ही बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता विकसित कर सके।
उन्होंने कहा, "हमने ईरानी शासन को कमजोर कर दिया है, लेकिन हम यह सुनिश्चित करेंगे कि ईरान को फिर से मजबूत होने का मौका न मिले। इस्राइल क्षेत्र में शांति और स्थिरता का पक्षधर है, जबकि ईरान इसके विपरीत है और अस्थिरता फैलाने का जिम्मेदार है।"
डैनन ने कहा कि हर देश को यह देखना चाहिए कि कौन शांति ला रहा है और कौन अराजकता फैला रहा है। उन्होंने दावा किया कि पिछले एक महीने में ईरान ने 13 देशों पर हमले किए, जबकि इस्राइल ने अपने 77 साल के इतिहास में कभी इतने देशों के साथ संघर्ष नहीं किया।
ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर, अब ब्लैकमेल कर रहा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में संबोधन के दौरान डैनन ने ईरान पर हमास जैसे संगठनों का समर्थन करने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि "इस्राइल और उसके अमेरिकी सहयोगियों ने 8,500 से ज्यादा हमले कर ईरान के मिसाइल लॉन्चर, हथियार उत्पादन केंद्र और कमांड ढांचे को निशाना बनाया। ईरान की वायु सेना और नौसेना गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी है। अब ईरान अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसे सफल नहीं होने दिया जाएगा।"
ट्रंप का संकेत – युद्ध समाप्ति की दिशा में अमेरिका
वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक कमजोर हो चुकी है और अमेरिका इस युद्ध को खत्म करने के करीब है।
हालांकि, ईरान की ओर से अब तक कोई औपचारिक वार्ता की पुष्टि नहीं हुई है। तेहरान ने साफ कहा है कि शांति तभी संभव है, जब अमेरिका और इस्राइल अपनी सैन्य कार्रवाई बंद करें।