बहराइच: भारत के आखिरी गांव भरथापुर के विस्थापन के बाद नई बसावट के लिए बनाई जा रही कालोनी का नाम बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भरतपुर रखने का एलान किया। इस अवसर पर उन्होंने 136 परिवारों को आवास और भूमि आवंटन पत्र के चेक वितरित किए। मंच पर 10 महिलाओं को मुख्यमंत्री ने अपने हाथों से भूमि आवंटन पत्र सौंपे। नए भरथापुर को बसाने के लिए 21 करोड़ 55 लाख 55 हजार 951 रुपये जारी किए गए।

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया 29 अक्टूबर का हादसा

मुख्यमंत्री ने कहा, “अक्टूबर 2025 को याद कीजिए, जब भरथापुर गांव से जुड़े लोग नाव से सामान ले जाते समय सरयू नदी में डूब गए। इस हादसे में नौ लोगों की मौत हो गई थी। उस समय जब मैंने प्रशासन से बातचीत की, तो पता चला कि दुर्घटना वाली जगह पर घड़ियाल और मगरमच्छ रहते हैं। मैं अंदर से कांप गया और उनकी पीड़ा महसूस की। इसके बाद राहत कार्यों को आगे बढ़ाया गया और आज इन परिवारों को सेमरहना तहसील में विस्थापित किया जा रहा है।”

कालोनी का नाम “भरतपुर” रखने का अर्थ

मुख्यमंत्री ने बताया कि चैत्र नवरात्र में भगवान राम युद्ध जीतकर अयोध्या अपने भाई भरत से मिलने आए थे। दोनों में भाई का प्रेम दर्शाया गया। उसी तरह भरथापुर और सेमरहना के लोग भाई-भाई जैसे प्रेम और सहयोग से रहें, इसलिए नई कालोनी का नाम भरतपुर रखा गया।

विस्थापित मुन्नालाल ने जताया आभार

भरथापुर निवासी मुन्नालाल मौर्य ने कहा, “हमारा गांव तीन नदियों से घिरा हुआ है और पहले किसी प्रकार की सुविधाएं नहीं थीं। स्कूल, शौचालय जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए हमें 60 किलोमीटर तक नाव से जाना पड़ता था। जमीन नदी में कट चुकी थी और रोजगार भी नहीं था। 29 अक्टूबर को हुए नाव हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने तुरंत संज्ञान लिया और हमें सुरक्षित स्थान पर बसाया गया। हम सभी बहुत खुश हैं। मुख्यमंत्री जी का हार्दिक आभार।”