लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को निशाने पर लेते हुए कहा कि उनसे किसी तरह की सहयोग या समर्थन की उम्मीद रखना बेवकूफी होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने राज्य को अपराध का अड्डा बना दिया था और यहां कर्फ्यू की घटनाएं आम हो गई थीं।

सीएम ने वंदे मातरम् के 150वें वर्ष का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि सपा और कांग्रेस इसका विरोध क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर इस देश में रहोगे, तो कम से कम इसके राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान दिखाओ।”

मुख्यमंत्री ने पहले की सरकारों के परिवारवादी विकास मॉडल पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने जेपीएनआईसी परियोजना का उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्व सरकारों ने 800 करोड़ रुपये खर्च कर भी परियोजना अधूरी छोड़ दी थी। वहीं, उनकी सरकार ने जेपी की जन्मभूमि पर अस्पताल बनवाया और गोमती रिवर फ्रंट परियोजना में 1,400 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि यह मूलतः 300 करोड़ रुपये की परियोजना थी।

सीएम योगी ने युवाओं के सामने आई पहचान की चुनौती का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों की अराजक नीतियों के कारण कई युवा पहचान के संकट से जूझ रहे थे और किसान आत्महत्या के लिए मजबूर थे। उन्होंने प्रदेश में सुरक्षा की स्थिति में सुधार का दावा करते हुए बताया कि मेरठ से दिल्ली यात्रा अब केवल 45 मिनट में संभव है और 22 एक्सप्रेसवे वाले राज्य में सात पहले से ही क्रियाशील हैं, पांच निर्माणाधीन हैं और दस पर काम जारी है।

राशन वितरण में सुधार और टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2017 से पहले शिकायतों का बोझ था, लेकिन अब 6 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा से ऊपर उठ चुके हैं। उन्होंने एआई और डेटा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह युवा उद्यमिता और स्टार्टअप्स के लिए सबसे बड़ी ताकत बन चुका है।

सीएम ने ‘सीएम युवा उद्यमी’ स्कीम का उल्लेख किया और बताया कि हर साल एक लाख युवा उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं। लखनऊ में पहली ईवी यूनिट स्थापित की जा चुकी है और प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि यूपी में बेरोजगारी दर अब केवल 2.24% है और राज्य की इलेक्ट्रिक वाहन और तिपहिया वाहन उत्पादन क्षमता देश में सबसे आगे है।