नोएडा। सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की कार गहरे गड्ढे में गिरने से हुई मौत के बाद सामने आया है कि इस खतरनाक स्थिति को लेकर पहले ही चेतावनी दी जा चुकी थी। संबंधित डेवलपर कंपनी एमजेड विजटाउन प्लानर्स ने वर्ष 2022 में नोएडा प्राधिकरण को पत्र लिखकर सीवर और मुख्य नाली लाइनों के धंसने तथा लगातार जलभराव की समस्या से अवगत कराया था। कंपनी ने स्पष्ट शब्दों में आगाह किया था कि समय रहते मरम्मत न होने पर कोई भी गंभीर हादसा हो सकता है।

डेवलपर की ओर से प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजे गए पत्र में सेक्टर-150 स्थित प्लॉट एससी/02, ए-3 में सीवेज और ड्रेनेज के पानी के लगातार बहाव का जिक्र किया गया था। पत्र के अनुसार, क्षतिग्रस्त सीवर और नालियों के कारण पूरे बेसमेंट में गंदा पानी भर गया था, जिससे स्थिति बेहद खतरनाक बन चुकी थी।

पत्र में यह भी बताया गया था कि पानी के दबाव और मिट्टी के कटाव के चलते सड़क धंसने लगी है और मौके पर लगाई गई बैरिकेडिंग भी गिर रही है। डेवलपर ने तत्काल मरम्मत कर जलनिकासी व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की थी। इस चेतावनी की प्रतियां प्राधिकरण के योजना और कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस आयुक्त और स्थानीय थाना प्रभारी को भी भेजी गई थीं, इसके बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

खुले नाले और गहरी खाइयों से शहर में खतरा

सेक्टर-150 ही नहीं, बल्कि नोएडा के कई अन्य हिस्सों में भी खुले नाले और अधूरी खुदाई आम लोगों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं। सेक्टर-32 स्थित लॉजिक्स मॉल के पास सेक्टर 12-22 की ओर मुड़ते ही सड़क किनारे करीब 300 मीटर तक गहरी खाई बनी हुई है। यहां बेसमेंट निर्माण के लिए की गई खुदाई अधूरी पड़ी है और लोहे की सरिया बाहर निकली हुई हैं। यह इलाका सड़क से सटा होने के कारण वाहन चालकों और राहगीरों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है।

इसी तरह सेक्टर-24 के सामने नोएडा एलिवेटेड रोड के नीचे से गुजरने वाले मार्ग पर भी एक खुला नाला है, जहां न तो कोई सुरक्षा दीवार है और न ही ढक्कन। सेक्टर-22 और 23 के बीच नाले के किनारे भी बेहद कम ऊंचाई की दीवार बनी है, जिससे रात के समय हादसे की आशंका बनी रहती है। शहर में कई स्थानों पर कोंडली नाला भी खुला पड़ा है, जो दुर्घटनाओं को न्योता दे रहा है।

युवराज की मौत से सहमी सोसाइटी

युवराज की मौत के बाद सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के लोग गहरे सदमे में हैं। सोसाइटी की महिलाओं ने बताया कि जिस रास्ते से युवराज लौट रहे थे, उसी मार्ग से उनके बच्चे स्कूल जाते हैं और परिजन दफ्तर से देर रात लौटते हैं। अंधेरा होने के बाद यह रास्ता और भी खतरनाक हो जाता है।

सोसाइटी की महिलाओं का कहना है कि घटना के बाद से हर परिवार डरा हुआ है। देर होने पर घर लौटने वालों का इंतजार करते समय मन आशंकाओं से भर जाता है। सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कमजोर है, जिससे किसी भी अनहोनी का डर बना रहता है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि युवराज की मौत एक चेतावनी है। यदि समय रहते प्रशासन और प्राधिकरण ने लापरवाही नहीं बरती होती, तो यह हादसा टल सकता था। लोगों ने मांग की है कि खुले नालों और खतरनाक खुदाइयों को तुरंत सुरक्षित किया जाए, ताकि दोबारा किसी परिवार को ऐसा दर्द न सहना पड़े।