गाजियाबाद। पुलिस को पासपोर्ट फर्जीवाड़े में बड़ी कामयाबी मिली है। इस मामले का मुख्य आरोपी मुश्ताक अहमद अब क्राइम ब्रांच की गिरफ्त में है।

पुलिस की पूछताछ में बुधवार को गिरफ्तार हजमीत उर्फ रजमीत सिंह के बयान से मुश्ताक का नाम सामने आया। दिल्ली के डीडीए फ्लैट ख्याला में रहने वाला मुश्ताक अहमद फर्जी नाम और पते का इस्तेमाल कर पासपोर्ट जारी कराने का काम करता था। उसने इस सेवा के लिए 1 लाख से 2.5 लाख रुपये तक वसूले।

फर्जी पासपोर्ट का कारोबार

जांच में पता चला कि मुश्ताक ने हजमीत और उसके चार परिजनों के लिए कुल पांच पासपोर्ट बनवाए, हर पासपोर्ट के लिए लगभग 1.20 लाख रुपये वसूले गए। सूत्रों के अनुसार, उसका काम आवेदकों को ढूंढना और उनसे शुल्क वसूलना था। हजमीत का आवेदन महरौली स्थित पासपोर्ट सेवा केंद्र से कराया गया, जहाँ पहले से कुछ संपर्क होने की जानकारी मिली है।

नेटवर्क की पड़ताल

पुलिस अब पूरे फर्जी पासपोर्ट नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि मुश्ताक के अन्य सहयोगी भी इसमें शामिल थे। अधिकारी यह भी मान रहे हैं कि 22 पासपोर्ट के अलावा और मामलों में भी उसका हाथ हो सकता है।

क्राइम ब्रांच का कहना है कि आरोपित से कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ मिली हैं। अब जांच यह पता लगाने में लगी है कि पासपोर्ट सत्यापन प्रक्रिया में किन-किन स्तरों पर मिलीभगत हुई और कितने लोगों ने इस नेटवर्क के माध्यम से पासपोर्ट प्राप्त किए।