रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट में शनिवार को सुनवाई पूरी हो गई है। कोर्ट ने अब अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर इलाके में 2008 में हुई 3.53 एकड़ जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वाड्रा और अन्य पर आरोप लगाते हुए चार्जशीट दाखिल की थी। अब कोर्ट यह तय करेगी कि इस चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। अगली सुनवाई 15 अप्रैल को होगी।

ईडी का आरोप है कि वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड ने उस समय ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज से यह जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी, जबकि कंपनी के पास इतनी पूंजी मौजूद नहीं थी। एजेंसी का दावा है कि सौदे में कई अनियमितताएं हुईं, जैसे असली भुगतान नहीं करना, सेल डीड में गलत जानकारी देना और एक चेक का जिक्र करना जो कभी जारी नहीं हुआ।

जांच एजेंसी का यह भी कहना है कि जमीन की कीमत को जानबूझकर कम दिखाया गया ताकि स्टाम्प ड्यूटी में हेरफेर किया जा सके। ईडी ने इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 423 के तहत अपराध माना है। शिकायत में कहा गया है कि इस सौदे से करीब 58 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई हुई।

इसके चलते ईडी ने करीब 38.69 करोड़ रुपये मूल्य की 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी तौर पर अटैच कर दिया है। ये संपत्तियां वाड्रा और उनकी कंपनियों—आर्टेक्स, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी समेत अन्य फर्मों—के नाम दर्ज हैं।

इस मामले में हरियाणा के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने 2012 में जांच के बाद गड़बड़ी का हवाला देते हुए डील रद्द कर दी थी। हालांकि बाद में एक सरकारी पैनल ने वाड्रा और डीएलएफ को क्लीन चिट दे दी। भाजपा सरकार के आने के बाद मामले में पुनः जांच शुरू हुई और एफआईआर दर्ज की गई।