गाजीपुर में विनीत राय हत्याकांड के आरोपी कमलेश बिंद के पुलिस एनकाउंटर को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे लेकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर होनी चाहिए और मुठभेड़ के बजाय न्यायिक प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

सीतापुर में एक कार्यक्रम के दौरान और बाद में अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत में डॉ. निषाद ने कहा कि अपराधी का कोई जातिगत आधार नहीं होता, लेकिन हर व्यक्ति को कानून के तहत अपना पक्ष रखने और अदालत में पेश होने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार, यदि किसी पर आरोप है तो उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया जाना चाहिए, जहां साक्ष्यों के आधार पर सजा तय हो।

उन्होंने दावा किया कि विनीत राय हत्याकांड में कमलेश बिंद की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं और उसे मुख्य आरोपी नहीं बताया जा रहा है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि मृतक की पत्नी का कहना है कि कमलेश को थाने में कथित रूप से प्रताड़ित किया गया और बाद में एनकाउंटर कर दिया गया। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।

“मुख्य आरोपियों पर भी कार्रवाई हो”

डॉ. संजय निषाद ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कार्रवाई करनी ही थी तो मामले के अन्य मुख्य आरोपियों पर भी समान रूप से सख्ती दिखाई जानी चाहिए थी। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को चुनौती देते हुए कहा कि अगर कार्रवाई सही है तो सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसी प्रक्रिया अपनाई जाए।

रासुका की चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया

एनकाउंटर के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद पुलिस द्वारा उपद्रवियों पर रासुका (राष्ट्रीय सुरक्षा कानून) लगाने की चेतावनी पर भी उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। डॉ. निषाद ने कहा कि अगर रासुका लगानी है तो पहले उन पर या उनके समाज के लोगों पर लगाकर दिखाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि निषाद और बिंद समाज को निशाना बनाया जा रहा है और यह रवैया सामाजिक असंतुलन पैदा कर सकता है।

उन्होंने कहा कि वह इस पूरे मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएंगे और कुछ अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े करेंगे, क्योंकि इससे सरकार की छवि और जनता के बीच संदेश प्रभावित हो रहा है।