6 जनवरी को जारी की गई अनंतिम विधानसभा मतदाता सूची में बड़ी संख्या में विसंगतियां सामने आई हैं। कई स्थानों पर मतदाताओं के नाम और पते आपस में मेल नहीं खाते। कहीं एक घर में असामान्य रूप से दर्जनों मतदाता दर्ज हैं, तो कहीं एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग बूथों में दर्ज दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा, सूची में मृत व्यक्तियों के नाम शामिल होने से भी सवाल खड़े हो गए हैं।
कुछ मामलों में यह देखा गया है कि एक ही मकान संख्या पर 18 से लेकर 40 से अधिक मतदाता दर्ज हैं, जबकि वास्तविकता में वहां सीमित परिवार रहता है। कई मतदाता ऐसे पतों पर दर्ज पाए गए हैं, जिनसे उनका कोई संबंध नहीं है। स्थिति यह है कि कई बीएलओ भी इन गड़बड़ियों पर खुलकर बोलने से बच रहे हैं।
मामला एक: एक पते पर अनजान नाम दर्ज
अकबरपुर-रनियां विधानसभा क्षेत्र के निवासी दिनेश तिवारी (52) के परिवार में कुल पांच मतदाता हैं, लेकिन उनके घर के पते पर तीन अतिरिक्त नाम दर्ज पाए गए हैं। इनमें फैज मोहम्मद सहित उनके परिवार के सदस्य शामिल हैं, जबकि एक नाम ऐसा है जिसका परिवार से कोई संबंध स्पष्ट नहीं है। इस गलती को लेकर दिनेश तिवारी असमंजस में हैं।
मामला दो: एक घर में 48 मतदाता
इसी विधानसभा क्षेत्र के धर्मेंद्र शर्मा (39) के परिवार में पत्नी सहित कुल पांच सदस्य हैं, लेकिन अनंतिम सूची में उनके पते पर 48 मतदाता दर्ज दिखाई दे रहे हैं। इन नामों में विभिन्न उपनामों वाले मतदाता शामिल हैं, जिससे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
मामला तीन: पति-पत्नी अलग-अलग पतों पर
मसौदा मतदाता सूची में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां आशीष (51) के परिवार के छह सदस्यों के नाम एक ही पते पर दर्ज हैं, जबकि उनकी पत्नी अनुराधा का नाम किसी अन्य घर के पते पर दर्शाया गया है।
मृतकों के नाम भी सूची में
रूरा के शास्त्रीनगर निवासी रजनीकांत का निधन अगस्त 2024 में हो चुका है, इसके बावजूद उनका नाम कच्ची मतदाता सूची में शामिल है। सवाल यह उठ रहा है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान उनका सत्यापन किसने किया। इसी तरह, गणेशगंज निवासी सूर्यमुखी, जिनका नवंबर 2025 में निधन हो गया था, उनका नाम भी एसआईआर शुरू होने के बाद जारी सूची में दर्ज पाया गया है।
प्रशासन का पक्ष
जिला निर्वाचन अधिकारी कपिल सिंह ने कहा कि जिन मामलों में एक ही पते पर असामान्य संख्या में मतदाता दर्ज हैं, उनकी जांच कराई जाएगी। यदि किसी मृत व्यक्ति का नाम गलती से सूची में शामिल हुआ है, तो फॉर्म-7 के माध्यम से उसे हटाया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाल ही में बूथों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ स्थानों पर परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग बूथों में चले गए हैं, जिसे जल्द सुधारा जाएगा।