लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में मजारों को लेकर विवाद सोमवार को फिर तेज हो गया। ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन ने कुलपति और भूमि मामलों के नोडल प्रो. केके सिंह के खिलाफ तहरीर दी है। वहीं, केजीएमयू प्रशासन ने मिशन पर धमकाने और छवि खराब करने का आरोप लगाते हुए कानूनी नोटिस भेजा है।

मजारों के निष्कासन को लेकर विवाद

केजीएमयू प्रशासन ने पिछले साल से परिसर में बने मजारों को अवैध करार देते हुए अभियान शुरू किया। पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. केके सिंह को भूमि मामलों का नोडल बनाया गया। इसी के तहत 26 अप्रैल, 2025 को हाजी हरमैन शाह की मजार के आसपास के अतिक्रमण को न्यायालय के आदेश और पुलिस की निगरानी में हटाया गया था।

23 जनवरी, 2026 को प्रशासन ने परिसर में पांच मजारों की दीवारों पर नोटिस लगाकर 15 दिन में उन्हें हटाने का निर्देश दिया। इसके बाद 9 फरवरी को दूसरी नोटिस जारी कर अतिरिक्त 15 दिन का समय दिया गया।

मोहम्मदी मिशन का पक्ष

ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के महासचिव सैयद बाबर अशरफ ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई। उनका कहना है कि 26 अप्रैल, 2025 को मजार पर बलपूर्वक प्रवेश किया गया, सामूहिक विध्वंस किया गया और श्रद्धालुओं को धमकाया गया। मिशन ने प्रशासन को मजार का स्वामित्व देने का अनुरोध किया था, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अगर मामला नहीं सुलझा तो हर जनपद में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।

केजीएमयू प्रशासन का पक्ष

केजीएमयू प्रवक्ता प्रो. केके सिंह ने बताया कि मजार को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया गया। आसपास का अतिक्रमण न्यायालय के आदेश के तहत हटाया गया। मजार का प्रबंधन एक समिति के पास है, जिसमें मिशन पक्षकार नहीं था।
प्रो. सिंह ने कहा कि नोटिस में इस्तेमाल की गई धमकीपूर्ण भाषा अनुचित है, इसलिए मिशन को कानूनी नोटिस भेजा गया। उनका कहना है कि प्रशासन केवल अपनी संपत्ति को कानूनी तरीके से मुक्त करा रहा है और व्यक्तिगत आरोप बेबुनियाद हैं।

जांच प्रक्रिया जारी

चौक कोतवाली के इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय ने कहा कि मोहम्मदी मिशन द्वारा दी गई तहरीर की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही FIR दर्ज की जाएगी।