मेरठ। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को प्रयागराज में होने वाले राष्ट्रीय चिंतन शिविर में शामिल होने के लिए मेरठ सिटी स्टेशन से संगम एक्सप्रेस द्वारा प्रस्थान किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे किसानों ने ट्रेन की कई बोगियों में प्रवेश कर लिया, जिससे आम यात्रियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
शाम ढलते ही सिटी स्टेशन पर भाकियू कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा हो गई। ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने कई डिब्बों को अपने कब्जे में ले लिया। आरक्षित टिकट लेकर यात्रा करने वाले यात्रियों को अपनी सीटों तक पहुंचने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ के कारण ट्रेन के अंदर अव्यवस्था की स्थिति बन गई। यात्रा के दौरान कुछ बोगियों में किसानों ने गीत-संगीत और रागिनी कार्यक्रम शुरू कर दिए, जिससे माहौल पूरी तरह आंदोलन जैसा नजर आया।
प्लेटफॉर्म पर ही हुई पंचायत
प्रयागराज रवाना होने से पहले शाम करीब पांच बजे भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी के नेतृत्व में कार्यकर्ता सिटी स्टेशन पर एकत्र हुए। यहां प्लेटफॉर्म को ही बैठक स्थल बनाकर किसानों ने हाल ही में गन्ना भवन में आयोजित महापंचायत में उठाई गई मांगों पर चर्चा की। किसानों का कहना था कि उस पंचायत में प्रशासन ने प्रमुख सचिव (गन्ना) और मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात कराने का भरोसा दिया था, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है।
इस मुद्दे को लेकर किसानों में नाराजगी देखी गई। पंचायत के बाद नारेबाजी करते हुए सभी कार्यकर्ता संगम एक्सप्रेस से प्रयागराज के लिए रवाना हो गए। मौके पर बड़ी संख्या में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लौटने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
भाकियू जिलाध्यक्ष अनुराग चौधरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन किसानों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल संगठन चिंतन शिविर में भाग लेने जा रहा है, लेकिन लौटने के बाद यदि मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।
रेल रोको आंदोलन की चेतावनी
इस पूरे कार्यक्रम में संगठन के युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी गौरव टिकैत का मार्गदर्शन रहा। रवाना होने से पहले किसानों ने एसीएम सिविल लाइंस को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि यदि जल्द ही किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ और उच्च अधिकारियों से वार्ता नहीं कराई गई, तो भाकियू रेल रोको आंदोलन करने को मजबूर होगी।