उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति अब लगातार उलझती जा रही है। मौजूदा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 25 मई 2026 को समाप्त होना है, लेकिन अभी तक चुनाव की कोई आधिकारिक प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इसी वजह से प्रदेशभर के ग्राम प्रधानों में असमंजस और चिंता बढ़ती जा रही है।
इसी मुद्दे को लेकर शनिवार को अखिल भारतीय ग्राम प्रधान संगठन से जुड़े बड़ी संख्या में प्रधान मुजफ्फरनगर के गांधीनगर क्षेत्र स्थित राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल के आवास पर पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा और साफ कहा कि या तो तय समय पर पंचायत चुनाव कराए जाएं या फिर मौजूदा कार्यकाल को बढ़ाया जाए।
प्रधानों का कहना है कि चुनाव में देरी होने से गांवों में चल रहे विकास कार्य प्रभावित होंगे। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि कोरोना काल के दौरान भी कार्यकाल विस्तार नहीं दिया गया था, जिससे कई प्रशासनिक और वित्तीय दिक्कतें सामने आई थीं। ऐसे में इस बार स्थिति दोबारा न बने, इसकी मांग की गई।
इसके बाद प्रधानों का एक प्रतिनिधिमंडल कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार के आवास पर भी पहुंचा और उनसे अपनी बात रखी। प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाए।

इस पर कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। साथ ही कैबिनेट बैठक में भी इस विषय पर चर्चा कराने की बात कही गई।
फिलहाल पंचायत चुनाव को लेकर बनी अनिश्चितता अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर अहम मुद्दा बनती जा रही है। सरकार के अगले फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर लाखों ग्राम प्रधानों और ग्रामीण विकास से जुड़ा हुआ है।