मुजफ्फरनगर जिला कारागार से एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहाँ दो बंदियों ने बोर्ड परीक्षाओं में सफलता हासिल कर नई मिसाल कायम की है। जेल में रहते हुए पढ़ाई जारी रखते हुए इन दोनों ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की, जिससे यह साबित हुआ कि कठिन हालात भी शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं बनते।

हाईस्कूल परीक्षा में हत्या के मामले में निरुद्ध अंकित पाल (पुत्र जयविंद्र) ने 62.5 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम श्रेणी में सफलता पाई। उसे भोपा पुलिस ने 13 मई 2023 को जेल भेजा था। जेल में रहते हुए उसने अपनी पढ़ाई जारी रखी और पुलिस निगरानी में परीक्षा दी।
वहीं, इंटरमीडिएट (विज्ञान वर्ग) में आयुष (पुत्र सुनील) ने 56 प्रतिशत अंक प्राप्त कर द्वितीय श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण की। आयुष को खतौली पुलिस ने एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में 27 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था। बाद में 16 नवंबर 2024 को उसे जमानत मिल गई थी।
जेल प्रशासन के मुताबिक, आयुष का नामांकन जेल के माध्यम से कराया गया था और उसे वहीं परीक्षा की तैयारी भी कराई गई। रिहाई के बाद उसने परीक्षा दी और सफलता हासिल की।
दोनों बंदियों की इस उपलब्धि के पीछे उनकी मेहनत के साथ-साथ जेल प्रशासन का सहयोग भी अहम रहा। प्रशासन ने उन्हें पढ़ाई के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई और अनुकूल वातावरण देने का प्रयास किया।
जेल अधिकारियों का कहना है कि शिक्षा, बंदियों के सुधार और उनके भविष्य को बेहतर बनाने का एक सशक्त माध्यम है, और ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।