मुजफ्फरनगर में साइबर पुलिस ने डिजिटल माध्यम से ठगी करने वाले विदेशी गिरोह से जुड़े तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये लोग अपने साथियों के साथ मिलकर करीब 85 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर चुके हैं।

पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से बात करते हुए एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि हाल ही में चेन्नई (तमिलनाडु) में एक उद्यमी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके साथ डिजिटल ठगी हुई और 4.05 करोड़ रुपये ऐप्प के जरिए हड़प लिए गए। जांच में यह सामने आया कि इस रकम का कुछ हिस्सा मुजफ्फरनगर में निकाला गया।

साइबर थाना प्रभारी सुल्तान सिंह ने टीम के साथ गहन छानबीन की। मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और बैंक खातों की जांच से पूरे नेटवर्क का पता चला। पुलिस ने चरथावल के गांव कुटेसरा निवासी नदीम पुत्र मेहरबान, गुफरान पुत्र मुस्तफा और खालापार थाने के सुजडू क्षेत्र निवासी मयूर अफजल राना पुत्र नौशाद राना को गिरफ्तार किया। तीनों आरोपी देशभर में ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोहों को कमीशन के लालच में बैंक खाते उपलब्ध कराते थे।

जांच में सामने आया कि आरोपितों ने 10 से अधिक बैंक खातों का इस्तेमाल किया और दो महीनों में लगभग 30 लाख रुपये का लेन-देन किया। देशभर से दर्ज करीब 70 शिकायतों के आधार पर यह पता चला कि कुल धोखाधड़ी की राशि 85 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इसमें से 60 लाख रुपये सीधे तीनों के खातों में आए। पुलिस के कब्जे से दो मोबाइल, डायरी और कई बैंक दस्तावेज बरामद हुए हैं, जिनकी गहनता से जांच जारी है।

एसपी क्राइम ने बताया कि आरोपित हर लेन-देन पर 5 से 10 प्रतिशत कमीशन लेते थे। ठगी की रकम को अमेरिकी डॉलर में बदलकर गिरोह के अन्य सदस्य तक पहुंचाया जाता था। जांच में एक अन्य आरोपी अहमद का नाम भी सामने आया है, जो वर्तमान में सऊदी अरब में है और उसकी भी बैंकिंग गतिविधियों की जांच की जा रही है।

शिक्षा और गिरोह में शामिल होने का सफर
नदीम और गुफरान केवल पांचवीं पास हैं, जबकि मयूर अफजल राना नौवीं पास है। गुफरान सऊदी अरब में कुछ समय रहा था, जहां उसने ऑनलाइन ठगी के तरीकों को देखा। लगभग छह महीने पहले वह कुटेसरा वापस आया और नदीम के साथ मिलकर कमीशन के लालच में गिरोह में शामिल हो गया। दोनों ने शुरुआत में अपने और अपने परिचितों के बैंक खाते लुटेरों को उपलब्ध कराए। बाद में उन्होंने गांव के ई-रिक्शा चालक, ड्राइवर और गरीब लोगों के पैन और आधार कार्ड का इस्तेमाल कर नए बैंक खाते खुलवाए और गिरोह के साथ जुड़ गए।

राशि का ट्रांसफर और डॉलर में बदलना
पुलिस ने बताया कि नदीम ठगी की रकम निकालकर गुफरान को देता था। दोनों अपने कमीशन के बाद शेष रकम मयूर अफजल राना को सौंपते थे। मयूर इसे अमेरिकी डॉलर से जुड़ी स्टेबल कॉइन (USDT) में बदलकर ऑनलाइन गिरोह को ट्रांसफर करता था।