जम्मू। पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी समूहों द्वारा जम्मू संभाग में घुसपैठ की योजना बनाने की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सीमा सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमावर्ती क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी है और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे तैयार कर लिए हैं।
खुफिया इनपुट से सतर्कता बढ़ी
सूत्रों के अनुसार किश्तवाड़, कठुआ और उधमपुर में हाल ही में आतंकियों की बड़ी कार्रवाई से पाकिस्तान बौखलाया हुआ है। अब वह हीरानगर सेक्टर के रास्ते जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों को भारत में भेजने की योजना बना रहा है। सुरक्षाबल इन घुसपैठ प्रयासों को नाकाम करने के लिए सतर्क हैं और सीमा से लगे इलाकों में सघन तलाशी अभियान चला रहे हैं।
हीरानगर और सांबा सेक्टर संवेदनशील क्षेत्र
हीरानगर और सांबा सेक्टर हमेशा घुसपैठ के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में इन रास्तों से कई आतंकवादी समूह भारत में प्रवेश कर चुके हैं। साल 2024 में कठुआ और सैडा सोहल में सुरक्षा बलों ने आतंकियों के साथ मुठभेड़ की थी। इन घटनाओं के बाद इस बार सुरक्षा और भी कड़ी कर दी गई है।
संदिग्ध गतिविधियों पर नजर
कठुआ जिले के ऐरवां में रविवार को तीन-चार संदिग्ध लोग देखे गए। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस और सुरक्षाबलों ने इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया। पठानकोट सीमा और आसपास के क्षेत्रों में वाहनों की गहन जांच भी की जा रही है।
जम्मू के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता
जम्मू जिले के सीमावर्ती इलाकों में हाई अलर्ट जारी है। बीएसएफ और अन्य सुरक्षा बल नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास लगातार निगरानी रख रहे हैं। हाल के दिनों में ड्रोन घुसपैठ की भी कोशिशें हुई हैं। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना सुरक्षा एजेंसियों को दें।
आतंकी मददगारों की पहचान और कार्रवाई
किश्तवाड़ में जैश कमांडर सैफुल्लाह और उसके साथियों के खात्मे के बाद सुरक्षाबल अब उन लोगों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो आतंकियों को रसद और सुरक्षा सहायता पहुंचाते थे। पुलिस ने आधा दर्जन से अधिक संदिग्धों की पहचान की है, जिनमें सरकारी तंत्र के लोग भी शामिल हो सकते हैं। इन नेटवर्क को तोड़ने के लिए चौतरफा अभियान चलाया जा रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, इन मददगारों ने आतंकियों को दुर्गम इलाकों में छुपने, भोजन, आश्रय, वित्तीय और संचार सुविधाएं उपलब्ध कराई थीं। 22 फरवरी को सैफुल्लाह और दो अन्य आतंकियों की मुठभेड़ में मौत के बाद अब इन रसद नेटवर्क की जाँच और भी तेज कर दी गई है।