मुजफ्फरनगर। टीईटी को अनिवार्य किए जाने के विरोध में बृहस्पतिवार को शिक्षकों ने शहर में प्रदर्शन किया। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के नेतृत्व में चल रहे प्रदेशव्यापी अभियान के तहत बड़ी संख्या में शिक्षक बीएसए कार्यालय पर एकत्र हुए, जहां उन्होंने नारेबाजी करते हुए धरना दिया। इसके बाद सभी शिक्षक पैदल मार्च करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखीं।
मार्च में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, जूनियर शिक्षक संघ, महिला शैक्षिक संघ और राष्ट्रीय शैक्षिक संघ से जुड़े शिक्षक शामिल रहे। दोपहर करीब एक बजे से शुरू हुआ यह प्रदर्शन एकजुटता के प्रदर्शन के रूप में देखा गया। शिक्षकों ने मांग की कि टीईटी अनिवार्यता से संबंधित आदेश पर पुनर्विचार किया जाए और पूर्व में नियुक्त शिक्षकों को राहत दी जाए।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष बालेंद्र कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए टीईटी अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। उन्होंने इसे पुराने शिक्षकों के साथ अन्याय बताया। बताया गया कि 22 फरवरी से प्रदेशभर में यह अभियान चल रहा है। इससे पहले शिक्षक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ और कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध जता चुके हैं।
धरने की अध्यक्षता राजेंद्र सिंह ने की। मार्च में ठाकुर प्रवीण सिंह, संजीव बालियान, राजन वशिष्ठ सहित करीब एक हजार शिक्षक मौजूद रहे।
महिला शिक्षक संघ ने अलग से सौंपा ज्ञापन
महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष उषा चौहान ने बताया कि विभिन्न संगठनों के साथ मिलकर मार्च में भागीदारी की गई। संघ ने अलग से ज्ञापन देकर कहा कि टीईटी अनिवार्यता से प्रदेश में लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे शिक्षकों पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है और यह निर्णय न्यायसंगत नहीं है। ज्ञापन सौंपने वालों में रश्मि मिश्रा, प्रीति चौहान, रश्मि धीमान, प्रीति ठाकुर और राखी चौधरी शामिल रहीं।
भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ ने किया अलग ऐलान
उधर, विचारों में मतभेद के कारण भाकियू शिक्षक प्रकोष्ठ इस मार्च में शामिल नहीं हुआ। प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र सिंह ने बयान जारी कर टीईटी अनिवार्यता का विरोध किया। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज को दिशा देने वाला वर्ग है, लेकिन वर्तमान में वह आर्थिक और मानसिक चुनौतियों से जूझ रहा है। उन्होंने घोषणा की कि इस वर्ष शिक्षक होली का त्योहार नहीं मनाएंगे। इसे शासन तक अपनी आवाज पहुंचाने का प्रतीकात्मक प्रयास बताया गया।