उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई परफॉरमेंस-बेस्ड ग्रेडिंग नीति शुरू की है। योगी सरकार की यह पहल युवाओं की रोजगार योग्यता को मजबूत करने और प्रशिक्षण केंद्रों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने पर केंद्रित है।
नई नीति के तहत प्रशिक्षण केंद्रों को लक्ष्य आवंटित होंगे
प्रदेश के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि सरकार कौशल विकास को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। नई नीति के तहत प्रशिक्षण केंद्रों का मूल्यांकन हर वर्ष फरवरी के अंतिम दिन तक पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा और मार्च में ग्रेडिंग को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके आधार पर अप्रैल में संस्थानों को नए लक्ष्य प्रदान किए जाएंगे।
दीर्घकालिक प्रदर्शन पर होगा जोर
वर्ष 2026-27 की ग्रेडिंग पिछले तीन वर्षों (2023-24, 2024-25 और 2025-26) के औसत प्रदर्शन के आधार पर तय की जाएगी। इससे केवल एक वर्ष के आंकड़ों की बजाय दीर्घकालिक कार्यक्षमता का संतुलित आकलन संभव होगा।
ग्रेडिंग प्रणाली और श्रेणियां
मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि ग्रेडिंग प्रक्रिया में केवल वे संस्थान शामिल होंगे जो फरवरी तक एम्पैनल हों और डिबार या ब्लैकलिस्ट में न हों। संस्थानों को ए, बी, सी और डी ग्रेड में वर्गीकृत किया जाएगा।
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36-40 अंक: ए ग्रेड
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30-36 अंक: बी ग्रेड
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25-30 अंक: सी ग्रेड
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25 से कम अंक: डी ग्रेड
यह प्रणाली नामांकन, प्रशिक्षण पूर्णता और परिणाम आधारित प्रदर्शन पर केंद्रित है। इसमें निजी और राजकीय संस्थान, दिव्यांग प्रशिक्षण केंद्र, स्टार्टअप्स और डीडीयू-जीकेवाई सहित कुल 1,712 प्रशिक्षण प्रदाता शामिल हैं।
नई व्यवस्था से बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को अधिक अवसर मिलेंगे, जबकि कमजोर संस्थानों पर सुधार का दबाव बढ़ेगा।