स्मार्ट प्रीपेड बिजली मीटर के बावजूद लोगों की बत्तियाँ गुल होने के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। रविवार को सोशल मीडिया के जरिए उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश में ‘प्रीपेड पीड़ित’ नामक एक नई श्रेणी बन गई है।

अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि जिन उपभोक्ताओं ने पहले ही बिजली का भुगतान कर दिया है, वे स्मार्ट मीटर की खामियों के कारण बार-बार बिजली कटौती और तकनीकी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब बिजली कंपनियों को पहले ही पैसा मिल जाता है, तो आम जनता को परेशान क्यों किया जा रहा है। उनका कहना था कि बिजली कंपनियों और सरकार के बीच तालमेल की कमी या मिलीभगत के कारण शिकायतों का समाधान समय पर नहीं हो पा रहा, जिससे लोग कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

‘उपभोक्ता से उपभुगता’ बनी जनता
सपा अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा सरकार के दौर में जनता ‘उपभोक्ता’ से ‘उपभुगता’ बन गई है, जिसे नीतियों की खामियों का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने पीड़ितों, दलितों और अल्पसंख्यकों के साथ अब ‘प्रीपेड पीड़ित’ लोगों की संख्या में भी वृद्धि का जिक्र किया। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश की जनता बदलाव चाहती है और उनकी सरकार आने पर बिजली व्यवस्था अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और उपभोक्ता हित में होगी।

महिला आरक्षण पर भी उठाई आपत्ति
अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण को लेकर भी भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि 2011 के पुराने आंकड़ों के आधार पर महिलाओं की जनसंख्या गिनना गलत है और जब आधार ही दोषपूर्ण होगा तो आरक्षण की जमीन कैसे मजबूत होगी। उनका कहना था कि पहले सटीक जनगणना कराई जाए, उसके बाद ही महिला आरक्षण पर बहस की जाए। उन्होंने साफ कहा, “जो सरकार महिलाओं को गिनना नहीं चाहती, वह उन्हें आरक्षण कैसे देगी। भाजपा और उनके साथी महिलाओं के साथ छलावा करना चाहते हैं, हम इसे होने नहीं देंगे।”

यह टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि संसद का बजट सत्र तीन दिन बढ़ाया गया ताकि 2023 में पारित महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले कानून को 2029 से लागू किया जा सके।