लखनऊ: अब प्रदेश सरकार न केवल बड़े धार्मिक मेलों, बल्कि छोटे और स्थानीय महत्व वाले धार्मिक आयोजनों का खर्च भी वहन करेगी।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रांतीय स्तर के मेलों के लिए स्वीकृत 50 करोड़ रुपये इसी उद्देश्य के लिए खर्च किए जाएंगे। इसके लिए नगर विकास विभाग ने सभी नगरीय निकायों से प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं, ताकि उनकी सूची के आधार पर मेलों का प्रांतीयकरण किया जा सके।
निकायों से जानकारी मांगी जा रही है कि उनके क्षेत्रों में कौन-कौन से धार्मिक मेले आयोजित होते हैं और उनका ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व क्या है। इस आधार पर प्रत्येक मेले के आयोजन और व्यवस्थाओं के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार का उद्देश्य केवल बड़े और प्रसिद्ध मेलों तक सीमित नहीं है, बल्कि ऐसे स्थानीय मेलों को भी पहचान देना है जिनका महत्व छोटे समुदायों और स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अधिक है। प्रदेश में कई धार्मिक मेलों की व्यापक जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन ये स्थानीय सांस्कृतिक और धार्मिक जीवन का अहम हिस्सा हैं।
उदाहरण के तौर पर बलरामपुर के देवीपाटन मंदिर में नवरात्र के दौरान लगने वाला मेला देशभर के श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। इसी तरह कई अन्य जिलों और शहरों में भी छोटे लेकिन महत्वपूर्ण मेलों का आयोजन होता है।
निकायों से जल्द प्रस्ताव न मिलने पर विभाग द्वारा उन्हें पत्र भेजकर विवरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएंगे। इस वित्तीय वर्ष में बची धनराशि निकायों को उपलब्ध कराई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में भी प्रावधान किया जाएगा।