अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा और दान से जुड़े कथित अनियमितताओं के मामले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) के तीनों सदस्य गुरुवार को अयोध्या पहुंचे और दिनभर विभिन्न पक्षों से पूछताछ कर साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
जांच के दौरान सबसे पहले ट्रस्टी डॉ. अनिल कुमार मिश्र से बंद कमरे में करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की गई। इसके बाद मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव को बुलाकर दान में प्राप्त आभूषणों और भूमि खरीद से संबंधित जानकारी ली गई। एसआईटी ने दोनों के बयानों की तुलना ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय द्वारा दी गई जानकारी से भी की।
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को कुछ दानदाताओं और भूमि खरीद से जुड़े व्यक्तियों को भी पूछताछ के लिए बुलाया गया है। जांच एजेंसी उन दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन करना चाहती है, जो हाल के दिनों में सार्वजनिक चर्चा का विषय बने हैं।
इसी बीच पुलिस ने मामले में गिरफ्तार आरोपी अविनाश शुक्ल की कस्टडी रिमांड हासिल कर ली है। शुक्रवार को उससे विस्तृत पूछताछ की जाएगी। जांच टीम उसे उसके प्रतापगढ़ स्थित पैतृक गांव भी ले जा सकती है ताकि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा सके।
जांच अधिकारियों ने मंदिर परिसर में नकदी गणना से जुड़े कर्मचारियों से भी बातचीत की। इस दौरान दानपात्रों से नकदी निकालने, उसकी गणना करने और रिकॉर्ड तैयार करने की पूरी प्रक्रिया को समझा गया। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित अनियमितताएं किस स्तर पर और किस तरह संभव हुईं।
गौरतलब है कि एसआईटी पहले भी जून माह में कई दिनों तक अयोध्या में रहकर जांच कर चुकी है और अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप चुकी है। इसके बाद दर्ज प्राथमिकी में आठ कर्मचारियों को आरोपी बनाया गया था, जिन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में रखा गया है।
उधर, अयोध्या विकास प्राधिकरण ने मामले से जुड़े एक आरोपी के परिवार को निर्माणाधीन मकान के संबंध में नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि भवन निर्माण से जुड़े आवश्यक स्वीकृति दस्तावेजों की जांच की जा रही है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
जांच के दौरान चंपत राय से भी भूमि खरीद और दान में मिले आभूषणों को लेकर सवाल पूछे गए। जमीन खरीद से जुड़े कुछ दस्तावेजों को लेकर पहले भी आरोप लगाए जा चुके हैं। अब एसआईटी उन व्यक्तियों से भी संपर्क कर रही है, जिनके नाम संबंधित दस्तावेजों में गवाह, विक्रेता या क्रेता के रूप में दर्ज हैं।
सूत्रों का कहना है कि जांच टीम ने अब तक कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र किए हैं। हालांकि एसआईटी के वरिष्ठ अधिकारी कुछ दिन पहले लखनऊ लौट गए थे, लेकिन उनकी टीम अयोध्या में रहकर रिकॉर्ड सत्यापन और दस्तावेजी कार्य करती रही।
मामले में अविनाश शुक्ल की भूमिका को लेकर भी जांच गहराई से की जा रही है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके पास से सबसे अधिक नकदी और विदेशी मुद्रा बरामद होने का दावा किया गया है। इसी आधार पर उसकी भूमिका की अलग से पड़ताल की जा रही है।
इसके अलावा एसआईटी भविष्य में ट्रस्ट के पूर्व पदाधिकारियों और उन लोगों से भी पूछताछ कर सकती है, जिन्होंने मंदिर प्रबंधन और दान व्यवस्था को लेकर गंभीर आरोप लगाए थे। जांच एजेंसी का उद्देश्य सभी पक्षों से जानकारी लेकर पूरे मामले की निष्पक्ष और व्यापक जांच सुनिश्चित करना है।