तेहरान/नई दिल्ली: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की तैयारियां तेज हो गई हैं। इजरायल और अमेरिका के हमलों में 28 फरवरी को उनकी मौत के बाद क्षेत्र में तनाव और युद्ध की स्थिति पैदा हो गई थी। अब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम लागू होने के बाद अंतिम विदाई का कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारत समेत कई देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।

सुरक्षा कारणों से शामिल नहीं होंगे मोजतबा खामेनेई

ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई अपने पिता के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होंगे। भारत में उनके प्रतिनिधि अयातुल्ला हकीम इलाही ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में बताया कि सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित इजरायली खतरे और निगरानी की आशंका जताई है। ऐसे में सार्वजनिक रूप से उनकी मौजूदगी को सुरक्षित नहीं माना गया है।

4 जुलाई से शुरू होंगे कार्यक्रम 

अली खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम 4 जुलाई से राजधानी तेहरान में शुरू होंगे। इसके बाद 7 जुलाई को पवित्र शहर कोम में धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जाएंगे। अंतिम चरण में 9 जुलाई को उनके पैतृक शहर मशहद में पूरे राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।

लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद

ईरानी प्रशासन को उम्मीद है कि छह दिनों तक चलने वाले इस शोक कार्यक्रम में लाखों लोग शामिल होंगे। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में श्रद्धांजलि सभाओं की तैयारी की गई है।

 ईरान में लगे बड़े बड़े पोस्टर

देशभर में अली खामेनेई की तस्वीरों वाले बड़े-बड़े पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए हैं। युद्ध की परिस्थितियों के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई, जबकि इस्लामी परंपरा के अनुसार सामान्यतः किसी व्यक्ति को निधन के 24 घंटे के भीतर दफनाने की परंपरा है।

भारत से भी पहुंचेगा प्रतिनिधिमंडल

अंतिम संस्कार में भारत की ओर से भी प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। जानकारी के अनुसार बिहार के राज्यपाल सैयद हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गरिटा भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे। वहीं, कांग्रेस की ओर से पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद भी समारोह में शामिल हो सकते हैं।