उत्तर प्रदेश के महोबा जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। शहर के हिंद टायर वाली गली में रहने वाले 70 वर्षीय रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी ओमप्रकाश सिंह राठौर और उनकी मानसिक रूप से कमजोर 27 वर्षीय बेटी रश्मि को उनके देखभाल करने वाले नौकर दंपती ने पिछले तीन सालों से कैद में रखा। आरोप है कि दोनों को भूखा रखा गया और शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। सोमवार को ओमप्रकाश सिंह संदिग्ध हालात में मृत पाए गए।

पिता-पुत्री की दयनीय स्थिति
सूचना पाकर मृतक के भाई अमर सिंह और अन्य परिजन मौके पर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि बेटी रश्मि बेहद कमजोर और दयनीय स्थिति में थी। अमर सिंह का आरोप है कि पिता-पुत्री अलग मकान में रहते थे और उनकी देखभाल के लिए चारखारी निवासी दंपती को रखा गया था।

तीन साल तक कैद में रखा गया
परिजन ने बताया कि नौकर दंपती ने मकान पर कब्जा कर ओमप्रकाश और रश्मि को नीचे के कमरे में कैद कर दिया था। पिछले तीन सालों में उन्हें किसी से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। जब भी परिजन मिलने आते, नौकर दंपती बहाने बनाकर उन्हें वापस लौटा देते थे।

भोजन और इलाज तक से वंचित
नौकर दंपती पर पिता-पुत्री को भोजन और उचित इलाज से वंचित रखने का भी आरोप है। हालांकि, सवाल उठता है कि परिजन इतनी लम्बी अवधि तक इस अत्याचार की सूचना पुलिस को क्यों नहीं दे पाए।

पुलिस ने की जांच शुरू
सीओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा।