रसूलपुर नंगला। गांव रसूलपुर नंगला निवासी नाजिम मलिक (28) का 26 दिनों की जद्दोजहद और लाखों रुपये खर्च करने के बाद रविवार को शव उसके पैतृक गांव पहुंचा। सात महीने पहले विदेश काम करने गए नाजिम की कंबोडिया में ब्रेन हेमरेज से अचानक मौत हो गई थी।

जानकारी के अनुसार, नाजिम मलिक, जो बास्टा क्षेत्र के यूसुफ मलिक के पुत्र थे, सात महीने पहले कंबोडिया में एक कंपनी में नौकरी करने गए थे। परिवार ने बताया कि 17 फरवरी को नाजिम ने फोन पर सभी को बताया कि सब ठीक है। उसी कंपनी में गांव के चार अन्य युवक भी काम कर रहे थे। लेकिन कुछ दिनों बाद नाजिम के निधन की खबर मिली, जिसने पूरे गांव में शोक की लहर फैला दी।

परिवार पर दुख का पहाड़

नाजिम अपने परिवार का मुख्य सहारा था। वह चार बहनों और एक छोटे भाई के लिए सहारा बने हुए थे। विदेश से लौटकर उसकी शादी की तैयारियों में परिवार जुटा हुआ था, लेकिन अचानक मौत की खबर ने सभी को झकझोर दिया।

शव लाने के लिए संघर्ष

परिजन नाजिम का शव जल्द से जल्द गांव लाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। करीब 26 दिनों की मेहनत और लगभग छह लाख रुपये खर्च करने के बाद रविवार को शव गांव पहुंचा। जैसे ही शव गांव में आया, ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई। भारी भीड़ ने अंतिम संस्कार में शामिल होकर श्रद्धांजलि दी। नाजिम का पार्थिव शरीर लगभग दस बजे सुपुर्द-ए-खाक किया गया।