बरेली के फरीदपुर से पूर्व विधायक रहे विजयपाल सिंह की बेटी की दहेज हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मृतका के पति और वाणिज्य कर विभाग के अधिकारी अश्वनी सिंह को दोषी मानते हुए 10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर 1.40 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष संख्या तीन की अदालत ने सुनाया।
2013 में हुई थी शादी, एक साल बाद दर्ज हुआ मुकदमा
जानकारी के मुताबिक, विजयपाल सिंह की पुत्री गीतू सिंह की शादी 6 मई 2013 को मेरठ निवासी अश्वनी सिंह से हुई थी। उस समय अश्वनी सिंह सहारनपुर में सेल टैक्स अधिकारी के पद पर तैनात था। शादी के बाद दोनों सहारनपुर के सदर बाजार क्षेत्र में किराये के मकान में रहते थे।
दो करोड़ रुपये दहेज मांगने का आरोप
मामले में पूर्व विधायक ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष की ओर से दो करोड़ रुपये की मांग की जा रही थी। मांग पूरी न होने पर उनकी बेटी को लगातार प्रताड़ित किया जाता था। कई बार समझाने के बावजूद हालात नहीं बदले।
2014 में संदिग्ध हालात में हुई थी मौत
पूर्व विधायक के अनुसार, 16 नवंबर 2014 को उन्हें बेटी की मौत की सूचना मिली। जब वह सहारनपुर पहुंचे तो शव जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखा मिला। आरोप लगाया गया कि दहेज की खातिर गीतू की हत्या कर शव को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की गई।
12 साल चला मुकदमा, 156 तारीखें लगीं
यह मामला करीब 12 वर्षों तक अदालत में चला। सुनवाई के दौरान 156 तारीखें पड़ीं और अभियोजन पक्ष ने नौ गवाह पेश किए। अदालत ने साक्ष्यों, गवाहों और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पति अश्वनी सिंह को दोषी माना।
सास-ससुर बरी, पति को 10 साल की सजा
अदालत ने मामले में पति अश्वनी सिंह को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष कारावास और 1.40 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं सास-ससुर को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी अहम सबूत
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के शरीर पर 12 जगह चोट के निशान मिले थे। सिर पर गंभीर चोट थी और सीने की चार पसलियां टूटी हुई पाई गई थीं। अदालत ने इसे महत्वपूर्ण साक्ष्य माना और माना कि मृतका के साथ मारपीट की गई थी।