परमाणु ऊर्जा विभाग ने सोनभद्र जिले के म्योरपुर ब्लॉक के नकटू क्षेत्र में 785 टन यूरेनियम ऑक्साइड होने के संकेत मिलने की जानकारी दी है। इसके बाद विस्तृत सर्वेक्षण का काम शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा कूदरी और अंजनगिरा के पहाड़ी-वन क्षेत्र में भी यूरेनियम खोज के लिए अनुसंधान जारी है। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) ने नकटू समेत 31 अन्य स्थानों को चिन्हित किया है, जहां यूरेनियम के भंडार होने की संभावना है।

यदि सर्वेक्षण के परिणाम अनुकूल रहे, तो सोनभद्र भारत के न्यूक्लियर एनर्जी मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत सरकार का यह मिशन 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य से जुड़ा हुआ है।

देश के 12 राज्यों में 47 संभावित यूरेनियम स्थल
जुलाई 2025 में एएमडी ने 12 राज्यों के 47 स्थानों में यूरेनियम ऑक्साइड के बड़े भंडार की पुष्टि की थी, जिसकी कुल मात्रा 4,33,800 टन बताई गई। इसमें सोनभद्र का नकटू भी शामिल है, जहां 785 टन यूरेनियम होने की संभावना जताई गई है। पिछले पांच साल से परमाणु ऊर्जा विभाग के तहत एएमडी जिले में खोदाई-परीक्षण का काम कर रहा है।

आदिवासी बहुल क्षेत्र में औद्योगिक विकास की संभावनाएं
बड़ी मात्रा में यूरेनियम की संभावना से आदिवासी बहुल और पिछड़े इस क्षेत्र में औद्योगिक विकास की उम्मीदें बढ़ गई हैं। ज्येष्ठ खान अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण कार्य भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग की सीधी निगरानी में किया जा रहा है और इसकी रिपोर्ट सीधे मंत्रालय को भेजी जाती है।

सोनभद्र में संभावित यूरेनियम स्थल
नकटू, कूदरी, नवाटोला, रिहंद से सटे कुंडारघाटी, दुद्धी-म्योरपुर, लाखर, बभनी, मुर्राटोला, जौराही और रंपाकूरर एरिया में यू-308 श्रेणी के यूरेनियम अयस्क मिलने की संभावना जताई गई है। यह अयस्क परमाणु रिएक्टरों में ईंधन के रूप में उपयोग किया जाता है।

भविष्य में परमाणु ऊर्जा का केंद्र बनने की संभावना
सोनभद्र-सिंगरौली क्षेत्र पहले से कोयले के बड़े भंडार और तापीय विद्युत संयंत्रों के कारण ऊर्जा हब के रूप में जाना जाता है। अब यूरेनियम के संभावित स्रोतों के सामने आने से यह जिला भविष्य में परमाणु ऊर्जा उत्पादन का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।