लखनऊ। राज्य सरकार द्वारा मजदूरी बढ़ाने के फैसले के बाद गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को अब पहले से अधिक वेतन मिलेगा। नए निर्णय के अनुसार कुशल श्रमिकों की मासिक मजदूरी में मार्च के मुकाबले करीब 3288 रुपये तक की बढ़ोतरी होगी।
सरकार के इस फैसले का फायदा सिर्फ इन दो जिलों तक सीमित नहीं रहेगा। प्रदेश के अन्य नगर निगम क्षेत्रों और जिलों में काम करने वाले श्रमिकों की मजदूरी में भी कम से कम 1335 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की जाएगी।
जिलों को तीन श्रेणियों में बांटा गया
औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय समिति ने पूरे प्रदेश को तीन अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर नई मजदूरी दरें तय की हैं। इन श्रेणियों के आधार पर अकुशल, अर्धकुशल और कुशल श्रमिकों के लिए मूल वेतन और महंगाई भत्ता जोड़कर नई दरें निर्धारित की गई हैं।
नई व्यवस्था के तहत कुल नौ प्रकार की मासिक अंतरिम मजदूरी दरें तय की गई हैं। इनमें गाजियाबाद और गौतमबुद्धनगर के श्रमिकों को सबसे अधिक वेतन मिलेगा। इसके बाद लखनऊ सहित 16 नगर निगम वाले जिलों में मजदूरी लगभग पांच प्रतिशत कम रहेगी, जबकि शेष 57 जिलों में उससे भी करीब पांच प्रतिशत कम दरें लागू होंगी।
पहले पूरे प्रदेश में थी समान मजदूरी
मार्च तक उत्तर प्रदेश में सभी जिलों में श्रमिकों के लिए समान न्यूनतम मजदूरी लागू थी। उस समय अकुशल श्रमिकों को 11,021 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों को 12,123 रुपये और कुशल श्रमिकों को 13,580 रुपये मासिक मजदूरी मिलती थी।
अप्रैल में महंगाई भत्ता जोड़कर बढ़ाई गई थी मजदूरी
श्रम विभाग ने एक अप्रैल से महंगाई भत्ता जोड़ते हुए मजदूरी में 292 से 360 रुपये तक की वृद्धि की थी। इसके बाद अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी 11,313 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों की 12,445 रुपये और कुशल श्रमिकों की 13,940 रुपये तय की गई थी।
अब और बढ़ेगा वेतन
हाल ही में नोएडा में श्रमिकों के प्रदर्शन के बाद गठित समिति ने मजदूरी दरों की दोबारा समीक्षा की। नई अंतरिम दरों के अनुसार गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद में अकुशल श्रमिकों के वेतन में 2669 रुपये, अर्धकुशल श्रमिकों में 2936 रुपये और कुशल श्रमिकों में 3288 रुपये की वृद्धि अप्रैल से लागू हो जाएगी।