मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र में नई उन्नति हासिल करने का सबसे कारगर तरीका है ‘गन्ना के साथ तिलहनी और दलहनी फसल की अंतःफसली खेती’ को बड़े पैमाने पर अपनाना। उन्होंने बताया कि इस मॉडल से गन्ना किसानों की आय सिर्फ दोगुनी नहीं होगी, बल्कि बहुगुणित बढ़ाने की संभावना है।
मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों को उगाने से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन, कम लागत और पूरे साल स्थिर आय सुनिश्चित होती है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत बनती है।
भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का विस्तार अब सीमित हो चुका है। इसलिए ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करने का एकमात्र रास्ता है इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश के कृषि भविष्य का नया मॉडल करार दिया, जो किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा तीनों प्रदान करता है।
मुख्यमंत्री ने यह योजना वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर में गन्ना की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है।
योगी ने कहा कि इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल शामिल करने से न केवल उत्पादन में बढ़ोतरी होगी, बल्कि प्रदेश और देश की तिलहन-दलहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक और व्यावहारिक आधार पर फसल का चयन करने के निर्देश दिए।
मूंग और अन्य फसलों को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने आईआईएसआर की सिफारिश के अनुसार रबी सीजन में सरसों और मसूर और जायद सीजन में उर्द और मूंग को प्राथमिकता देने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, लाभ और सुरक्षा मिलती है।
उन्होंने योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए वर्षवार रोडमैप तैयार करने और सहायता एवं अनुदान का स्पष्ट ढांचा बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि बड़े पैमाने पर अंतःफसलों को अपनाने से किसानों को तेज नकदी प्रवाह मिलेगा, एकल फसल का जोखिम कम होगा और कृषि अधिक स्थिर व टिकाऊ बनेगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि यह योजना केवल गन्ना क्षेत्र तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे पूरे प्रदेश के कृषि परिदृश्य में बदलाव लाने वाले मॉडल के रूप में लागू किया जाना चाहिए।