उत्तर प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी क्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक चली इस बैठक में नए मंत्रियों को विभागों के आवंटन और 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में विभाग बंटवारे को लेकर अंतिम सहमति बन गई है। हाल ही में 10 मई को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में छह नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जबकि दो राज्य मंत्रियों को कैबिनेट स्तर की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद कई दिनों तक विभागों का आवंटन नहीं होने से राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं, जो अब इस मुलाकात के बाद लगभग समाप्त मानी जा रही हैं।
जानकारों का कहना है कि इस बार विभागों का वितरण केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि आगामी 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर किया जा रहा है। पार्टी की रणनीति विभिन्न सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने पर केंद्रित बताई जा रही है।
सूत्र बताते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट मतदाताओं को साधने के लिए भूपेंद्र सिंह चौधरी को अहम भूमिका दी जा सकती है। वहीं, हाल ही में समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए मनोज पांडेय के जरिए ब्राह्मण समुदाय को साधने की कोशिश की जा रही है। इसके अलावा कृष्णा पासवान, सुरेंद्र दिलेर और कैलाश राजपूत जैसे मंत्रियों को दलित और पिछड़े वर्गों से जुड़ी जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि योगी-शाह की यह बैठक केवल विभाग बंटवारे तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य 2027 के चुनावी समीकरणों को और मजबूत करना भी है। माना जा रहा है कि विभागों की औपचारिक घोषणा जल्द की जा सकती है, जिसके बाद सरकार पूरी तरह से चुनावी तैयारियों में जुट जाएगी।